ई-विकास प्रणाली की अनदेखी पड़ी महंगी: कटनी कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई, 2 प्रबंधक निलंबित, 12 का कटेगा वेतन
कटनी : जिले में किसानों को पारदर्शी तरीके से खाद वितरण सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई ‘ई-विकास प्रणाली’ में लापरवाही बरतना 14 समिति प्रबंधकों को भारी पड़ गया है। समीक्षा बैठक के दौरान नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आने पर कलेक्टर आशीष तिवारी ने सख्त रुख अपनाते हुए दो समिति प्रबंधकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि अन्य 12 प्रबंधकों का एक सप्ताह का वेतन काटने के निर्देश जारी किए हैं।
कलेक्टर के कड़े निर्देश के बाद प्रशासन द्वारा निलंबन और वेतन कटौती के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
क्यों हुई कार्रवाई?
किसानों को बिना किसी परेशानी और पूरी पारदर्शिता के साथ खाद उपलब्ध कराने के लिए कटनी जिले में 1 अप्रैल से ‘ई-विकास प्रणाली’ (टोकन व्यवस्था) लागू की गई है। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि समितियों और उर्वरक विक्रेताओं द्वारा शत-प्रतिशत खाद की बिक्री इसी प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। इसके बावजूद इन प्रबंधकों द्वारा पारंपरिक रूप से पीओएस (POS) मशीन से खाद बांटी जा रही थी, जिस पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
इन अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज
- बाबूजी सेन (समिति प्रबंधक – खितौली, सिनगौड़ी एवं उबरा): ई-विकास प्रणाली के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता और अनुशासनहीनता के चलते इन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
- सतीश कुमार निगम (सहायक प्रबंधक व खाद प्रभारी – सिनगौड़ी): इन्होंने वर्ष 2025-26 में खाद का भौतिक वितरण तो कर दिया था, लेकिन ई-वितरण प्रणाली में इसकी एंट्री ही नहीं की। शासन के आदेशों की अवहेलना पर इन्हें भी निलंबित कर कार्य प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
- नए प्रभार: सिनगौड़ी में खाद प्रभारी का चार्ज अब श्री प्रमोद निगम और उपार्जन का प्रभार श्री रमाकांत दुबे को तत्काल सौंप दिया गया है।
12 प्रबंधकों पर आर्थिक गाज
प्रणाली को लेकर लापरवाही और ढुलमुल रवैया अपनाने वाले अन्य 12 समिति प्रबंधकों पर भी आर्थिक कार्रवाई की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर इन सभी के माह मई 2026 के वेतन से 7 दिनों (एक सप्ताह) की वेतन कटौती की जाएगी।
कलेक्टर का कड़ा संदेश: > शासन के नियमों और डिजिटल प्रणालियों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों के हक और पारदर्शिता से समझौता करने वाले कर्मचारियों पर आगे भी इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

