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IT रिटर्न में फर्जी डिडक्शन क्लेम किया तो खैर नहीं; 200% तक जुर्माना और 7 साल की जेल, टैक्स विभाग हुआ बेहद सख्त

IT रिटर्न में फर्जी डिडक्शन क्लेम किया तो खैर नहीं; 200% तक जुर्माना और 7 साल की जेल, टैक्स विभाग हुआ बेहद सख्त

IT रिटर्न में फर्जी डिडक्शन क्लेम किया तो खैर नहीं; 200% तक जुर्माना और 7 साल की जेल, टैक्स विभाग हुआ बेहद सख्त

नई दिल्ली: अगर आप भी इस असेसमेंट ईयर में अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने जा रहे हैं और टैक्स बचाने के लिए किसी शार्टकट या फर्जी हथकंडे के इस्तेमाल की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आयकर विभाग (Income Tax Department) अब पूरी तरह हाई-टेक और डेटा-बेस्ड हो चुका है। टैक्स देनदारी कम करने के लिए फर्जी इन्वेस्टमेंट दिखाना, नकली रसीदें लगाना या मेडिकल-एजुकेशन खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर क्लेम करना अब भारी मुसीबत खड़ी कर सकता है। विभाग ने साफ किया है कि जानबूझकर की गई टैक्स चोरी के मामलों में न सिर्फ भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

अब बच नहीं पाएंगे फर्जी दावे; AI और AIS से हो रही पल-पल की मॉनिटरिंग

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस है। आपके द्वारा किए गए एक-एक क्लेम को वेरिफाई करने के लिए विभाग के पास डिजिटल टूल्स हैं:

  • डेटा क्रॉस-वेरिफिकेशन: आपके रिटर्न का मिलान आपके एम्प्लॉयर, बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के डेटा के साथ-साथ आपके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS से किया जाता है।

  • धारा 271AAD के तहत 100% जुर्माना: यदि असेसमेंट के दौरान खाते में कोई गलत एंट्री मिलती है या जानबूझकर कोई ट्रांजैक्शन छिपाया जाता है, तो उस एंट्री की कुल वैल्यू के 100 फीसदी के बराबर जुर्माना ठोक दिया जाएगा। यानी जितनी टैक्स सेविंग नहीं होगी, उससे ज्यादा की चपत लग जाएगी।

समझें अंतर: अंडर-रिपोर्टिंग और मिस-रिपोर्टिंग में क्या फर्क है और कितना है जुर्माना?

आयकर अधिनियम की धारा 270A के तहत गलतियों को दो श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें जुर्माने की दरें बेहद सख्त हैं: IT रिटर्न में फर्जी डिडक्शन क्लेम किया तो खैर नहीं; 200% तक जुर्माना और 7 साल की जेल, टैक्स विभाग हुआ बेहद सख्त

 इनकम की अंडर-रिपोर्टिंग (Under-Reporting)

  • क्या है?: जब टैक्सपेयर से अनजाने में, कैलकुलेशन की गलती के कारण या किसी जानकारी के छूट जाने की वजह से वास्तविक आय से कम इनकम शो होती है।

  • जुर्माना: ऐसी स्थिति में अंडर-रिपोर्टेड इनकम पर बनने वाले टैक्स का 50 फीसदी पेनाल्टी के रूप में वसूला जाएगा।

इनकम की मिस-रिपोर्टिंग (Mis-Reporting)

  • क्या है?: जब टैक्सपेयर जानबूझकर फैक्ट्स को छिपाता है, फर्जी खर्चे या नकली रसीदें दिखाता है और जानबूझकर ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड नहीं करता।

  • जुर्माना: इस गंभीर धोखाधड़ी पर देय टैक्स का सीधा 200 फीसदी (तिगुना) भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।

Jail Terms: क्या टैक्स चोरी करने पर सीधे जेल हो सकती है?

जी हाँ, यदि टैक्स अधिकारियों को यह पुख्ता सबूत मिल जाता है कि टैक्सपेयर ने टैक्स चोरी के बड़े रैकेट या फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है, तो क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स शुरू की जाती हैं:

  • सेक्शन 276C (जानबूझकर टैक्स चोरी): इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर टैक्स चोरी की रकम के आधार पर 3 महीने से लेकर 7 साल तक की सश्रम जेल हो सकती है।

  • सेक्शन 277 (फर्जी दस्तावेज जमा करना): वेरिफिकेशन या डॉक्यूमेंटेशन में गलत जानकारी देने, फर्जी रसीदें या जाली सर्टिफिकेट्स लगाने पर जेल के साथ-साथ आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है।

यह कानूनी कार्रवाई आमतौर पर उन मामलों में तेजी से की जाती है जहां बड़े पैमाने पर फ्रॉड हुआ हो या फिर टैक्सपेयर बार-बार नियमों की अनदेखी कर रहा हो। साथ ही, फर्जी क्लेम सेट करने वाले बिचौलियों और प्रोफेशनल्स पर भी विभाग की पैनी नजर है।

यशभारत सलाह: टैक्स सेविंग के लिए हमेशा वैध निवेश (जैसे 80C, 80D आदि) का ही सहारा लें और सभी ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स संभाल कर रखें। लीगल तरीके से टैक्स बचाएं, सुरक्षित रहें।

-यशभारत डॉट कॉम

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