अगर आप पहली बार मां बनी है तो अपने नवजात बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करना जरूरी है इससे आपकी मेंटल हेल्थ ठीक रहेगी

अगर आप पहली बार मां बनी है तो अपने नवजात बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करना जरूरी है इससे आपकी मेंटल हेल्थ ठीक रहेगी नवजात शिशु के विकास के लिए सबसे जरूरी पोषण उसकी मां के दूध से ही प्राप्त होता है। मां का दूध नवजात शिशु के लिए एक संपुर्ण और आदर्श आहार है जो उसकी सारी जरूरतों को पूरा करता है। उसे बीमारियों से बचाता है, लेकिन आपको बता दें कि जितना बच्चों के लिए मां का दूध जरूरी होता है उतना ही मां को भी बच्चे को दूध पिलाना जरूरी होता है। ब्रेस्टफीड कराने से मां के मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है। इसको लेकर हमने एक्सपर्ट से बात की Dr Anamika Kawatra,Consultant Gynaecologist, Rainbow hospital और Dr. Aarushi Dewan, Clinical psychologist इस बारे में जानकारी दे रही हैं।

क्या ब्रेस्टफीडिंग कराने पर मेंटल हेल्थ बेहतर होती है?

Dr Anamika Kawatra बताती हैं कि ब्रेस्ट फीड कराने से मां और बच्चे के बीच इमोशनल बॉन्ड बनता है। मां के शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन रिलीज होते हैं जैसे ऑक्सीटोसिन, इसे लव हार्मोन के नाम से जाना जाता है। इससे तनाव कम होता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन में जाने का खतरा कम होता है। मां में प्यार और जुड़ाव की भावना बढ़ती है जो तनाव और चिंता को कम करने में सहायक हो सकता है।

अगर आप पहली बार मां बनी है तो अपने नवजात बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करना जरूरी है इससे आपकी मेंटल हेल्थ ठीक रहेगी

Dr. Aarushi Dewan, Clinical psychologist बताती हैं की डिलीवरी के एक साल तक मां तनाव में रहती हैं,उन पर सोसाइटी का प्रेशर होता है,बच्चे की सही देखभाल का प्रेशर होता है इस कारण महिलाएं अक्सर एंग्जाइटी की शिकार हो जाती है, लेकिन ब्रेस्टफीड कराने से महिलाओं में एंग्जाइटी कम होती है। मन में बुरे विचार नहीं आते हैं।

जब कोई महिला ब्रेस्टफीडिंग कराती है तो उसे समाज, परिवार और मित्रों से समर्थन प्राप्त होता है इससे भी मानसिक स्वास्थ्य में सुधार आता है। सकारात्मक भावना मानसिक स्वास्थ्य को समर्थन देती है और आत्मविश्वास को बढ़ाती है।

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां को बच्चे के साथ शांतिपूर्ण समय बिताने का अवसर मिलता है,जिससे मानसिक थकान कम हो सकती है। वहीं जन्म के बाद मां को अच्छी और गहरी नींद चाहिए होती है,लेकिन बच्चे को जब भूख लगती है और जब बच्चा रोता है तो मां को नींद लेना बड़ा कठिन हो जाता है। ऐसे में अगर मां बच्चे को दूध पिलाती है तो इससे बच्चा भी सोता है और मां की भी स्लीप साइकिल बेहतर हो सकती है।

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