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IBD vs IBS: पेट की इन दो बीमारियों के बीच का अंतर समझना क्यों है बेहद जरूरी?

IBD vs IBS: पेट की इन दो बीमारियों के बीच का अंतर समझना क्यों है बेहद जरूरी?

IBD vs IBS: पेट की इन दो बीमारियों के बीच का अंतर समझना क्यों है बेहद जरूरी?, आईबीडी (IBD) का पूरा नाम इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (Inflammatory Bowel Disease) है। आसान भाषा में कहें तो यह पाचन तंत्र (Digestive Tract) से जुड़ी एक गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, जिसमें पेट और आंतों में पुरानी सूजन, जलन और घाव हो जाते हैं।

कई लोग आईबीडी (IBD) को गलती से आईबीएस (IBS – इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) समझ लेते हैं, लेकिन ये दोनों बिल्कुल अलग हैं। आईबीएस में केवल पेट खराब होने के लक्षण दिखते हैं, जबकि आईबीडी में आंतों को शारीरिक रूप से नुकसान (सूजन या डैमेज) पहुंचता है।

आईबीडी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:

1. अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis)

यह बीमारी मुख्य रूप से आपकी बड़ी आंत (Colon) और मलाशय (Rectum) को प्रभावित करती है। इसमें बड़ी आंत की अंदरूनी परत पर लगातार सूजन रहती है और छोटे-छोटे छाले या अल्सर हो जाते हैं।

2. क्रोहन रोग (Crohn’s Disease)

यह बीमारी अल्सरेटिव कोलाइटिस से ज्यादा फैल सकती है। यह आपके मुंह से लेकर गुदा (Anus) तक पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है। यह आंतों की परतों में काफी गहराई तक सूजन पैदा करती है।

आईबीडी के मुख्य लक्षण (Symptoms)

इसके लक्षण कम या ज्यादा होते रहते हैं। कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • लगातार या लंबे समय तक दस्त (Diarrhea) रहना।
  • मल (Stool) के साथ खून या मवाद आना।
  • पेट में तेज दर्द, ऐंठन और मरोड़ होना।
  • बिना किसी कारण के तेजी से वजन कम होना।
  • हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना।
  • भूख कम लगना और कभी-कभी हल्का बुखार रहना।

आईबीडी होने के कारण (Causes)

मेडिकल साइंस में अभी तक इसके सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है, लेकिन इसके पीछे कुछ मुख्य वजहें मानी जाती हैं: IBD vs IBS: पेट की इन दो बीमारियों के बीच का अंतर समझना क्यों है बेहद जरूरी?

  • इम्यून सिस्टम का कमजोर होना (Autoimmune Response): जब हमारा शरीर किसी वायरस या बैक्टीरिया से लड़ते हुए गलती से अपने ही पाचन तंत्र की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला कर देता है, तो आंतों में सूजन आ जाती है।

  • अनुवांशिकी (Genetics): अगर परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही हो, तो इसका खतरा बढ़ जाता है।

  • बदलती जीवनशैली (Lifestyle): ज्यादा तनाव, खराब खान-पान (जैसे ज्यादा फैटी या प्रोसेस्ड फूड खाना) और स्मोकिंग भी इसे बढ़ावा देते हैं।

इलाज क्या है?

आईबीडी का कोई पक्का या स्थायी इलाज (Cure) नहीं है, लेकिन डॉक्टर दवाओं (जैसे एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स, इम्यूनोसप्रेसेन्ट्स) और सही डाइट के जरिए इसके लक्षणों को पूरी तरह कंट्रोल में रखते हैं, ताकि मरीज सामान्य जिंदगी जी सके। कुछ गंभीर मामलों में आंत के प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए सर्जरी की भी जरूरत पड़ती है।

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