उत्तर भारत में मूक कातिल परजीवी का खौफनाक खुलासा-भेड़ों-बकरियों से इंसानों में फैल रही जानलेवा बीमारी; 70% तक लीवर खराब होने का खतरा
उत्तर भारत में मूक कातिल परजीवी का खौफनाक खुलासा-भेड़ों-बकरियों से इंसानों में फैल रही जानलेवा बीमारी; 70% तक लीवर खराब होने का खतरा
उत्तर भारत में मूक कातिल परजीवी का खौफनाक खुलासा-भेड़ों-बकरियों से इंसानों में फैल रही जानलेवा बीमारी; 70% तक लीवर खराब होने का खतरा
हिसार: उत्तर भारत में इंसानों और बेजुबान पशुओं की सेहत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला वैज्ञानिक खुलासा हुआ है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि ‘इचिनोकोकस ग्रैनुलोसस’ (Echinococcus granulosus) नामक एक बेहद खतरनाक परजीवी (Parasite) के कई आनुवंशिक प्रकार (जीनोटाइप) उत्तर भारत में सक्रिय रूप से पैर पसार रहे हैं।
यह परजीवी भेड़ों और बकरियों के जरिए इंसानों में ट्रांसफर हो रहा है, जो मनुष्यों के शरीर में जाकर ‘सिस्टिक इचिनोकोकोसिस’ यानी ‘हाइडेटिड रोग’ (Hydatid Disease) जैसी जानलेवा बीमारी पैदा कर रहा है।
3 राज्यों के बूचड़खानों में हुई 1,049 पशुओं की जांच, पहली बार मिला ‘G6’ जीनोटाइप
यह महत्वपूर्ण और चेतावनी देने वाला अध्ययन हरियाणा के हिसार स्थित प्रतिष्ठित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिकों— पल्लवी मुदगिल, अंशू लोहान, अनिल के नेहरा, अनिल शर्मा और अमन डी. मुदगिल की टीम ने संयुक्त रूप से किया है:
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यहाँ हुई जांच: वैज्ञानिकों की टीम ने हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के विभिन्न बूचड़खानों (Slaughterhouses) से 1,049 भेड़ों और बकरियों के सैंपल लिए।
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DNA टेस्ट में हुआ खुलासा: जब संक्रमित पशुओं के नमूनों की हाई-टेक डीएनए (DNA) जांच की गई, तो वैज्ञानिक सन्न रह गए। इसमें परजीवी के G1, G3 और G6 जीनोटाइप पाए गए।
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चिंता का विषय: सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि ‘G6 जीनोटाइप’ पहली बार उत्तर भारत की भेड़ों और बकरियों में स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है, जो यह साबित करता है कि ये बेजुबान पशु इस खतरनाक बीमारी को समाज में फैलाने के मुख्य जरिया बनते जा रहे हैं।
कुत्तों के जरिए इंसानों तक पहुंच रहा है जानलेवा संक्रमण
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संक्रमण केवल जानवरों की मीट या उनके संपर्क तक सीमित नहीं रहता:
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संक्रमण का चक्र: यह परजीवी मुख्य रूप से संक्रमित कुत्तों और अन्य कैनिड प्रजाति (भेड़िया, सियार आदि) के माध्यम से मानव आबादी तक पहुंचता है।
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पब्लिक हेल्थ को खतरा: इससे पहले उत्तर भारत के इंसानों की मेडिकल जांच में भी G1, G3, G5 और G6 जीनोटाइप मिल चुके हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नई रिसर्च से अब यह समझने में आसानी होगी कि यह परजीवी इंसानों और जानवरों के बीच कैसे ट्रैवल कर रहा है, ताकि समय रहते महामारी को रोका जा सके।उत्तर भारत में मूक कातिल परजीवी का खौफनाक खुलासा-भेड़ों-बकरियों से इंसानों में फैल रही जानलेवा बीमारी; 70% तक लीवर खराब होने का खतरा
इंसानी शरीर पर अटैक: 70% तक डैमेज हो जाता है लीवर, फट जाए गांठ तो मौत पक्की
इस हाइडेटिड रोग का इंसानी शरीर पर होने वाला असर बेहद खौफनाक है। जब इस परजीवी के सूक्ष्म अंडे दूषित भोजन, पानी या किसी संक्रमित कुत्ते के संपर्क में आने से इंसान के पेट में चले जाते हैं, तो शरीर के भीतर यह तबाही मचाते हैं:
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अंगों में पानी की गांठ: परजीवी के लार्वा पेट से होते हुए शरीर के मुख्य अंगों में घुस जाते हैं और वहां ‘सिस्ट’ (पानी से भरी खतरनाक गांठें) बना लेते हैं।
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70% लीवर डैमेज: मेडिकल साइंस के मुताबिक, इस बीमारी के 70% मामलों में इंसान का लीवर पूरी तरह खराब (फेल) हो जाता है।
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फेफड़े और दिमाग पर असर: लीवर के अलावा यह संक्रमण फेफड़ों, गुर्दों (Kidneys), हड्डियों और सीधे इंसान के मस्तिष्क (Brain) को अपना शिकार बनाता है।
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जान का खतरा: सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है जब शरीर के अंदर बनी यह सिस्ट (गांठ) अचानक फट जाती है। इसके फटते ही पूरे शरीर में भयंकर एलर्जी फैलती है और मरीज को संभलने का मौका भी नहीं मिलता, जिससे उसकी तत्काल मौत हो सकती है।








