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Honey Trap: 22 माह के बाद Honey Girl श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन और मोनिका यादव को मिली जमानत

Honey trep

MP Honey Trap Case। मप्र के बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले में 22 महीने से जेल में बंद श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन और मोनिका यादव को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ से जमानत मिल गई।

कोर्ट ने कहा कि यह बात सही है कि आरोपितों ने अनैतिक और अपमानजनक कार्य किया है लेकिन उन्हें इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि वर्तमान परिस्थिति में प्रकरण की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगने की संभावना है। अभियोजन को 57 गवाहों के बयान कराना है। अभी तो आरोपितों पर आरोप तक तय नहीं हुए हैं। ऐसे में आरोपित महिलाओं को जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

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कोर्ट ने आरोपितों से कहा है कि वे विचारण न्यायालय के समक्ष 50 हजार रुपये की जमानत और इतनी ही रकम का निजी मुचलका प्रस्तुत करें। कोर्ट ने हनी ट्रैप मामले के फरियादी और तत्कालीन इंजीनियर हरभजनसिंह पर तल्ख टिप्पणी की है। फैसले में कोर्ट ने कहा है कि उसने अपने पद और अधिकारों का जमकर दुरुपयोग किया और आरोपितों से अंतरंगता बनाई। बाद में जब चीजें उसके निंयत्रण से बाहर हो गई तो वह भेडिया की तरह रोने लगा।

नगर निगम के तत्कालीन इंजीनियर हरभजनसिंह ने 17 सितंबर 2019 को पलासिया पुलिस थाने पर शिकायत दर्ज कराई थी कि दो महिलाएं उसे अश्लील वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल कर रही हैं। ये महिलाएं वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उससे तीन करोड़ रुपये मांग रही हैं।

बाद में उन्होंने इस रकम को दो करोड़ रुपये कर दिया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 19 सितंबर 2019 को श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन और एक अक्टूबर 2019 को मोनिका यादव नामक महिलाओं को हिरासत में ले लिया। ये महिलाएं तब से ही जेल में हैं।

हनी ट्रैप मामले की सुनवाई सात माह आगे बढ़ी
इन आरोपित महिलाओं ने एडवोकेट विजय कुमार चौधरी, अमरसिंह राठौर, विवेकसिंह, यावर खान, धर्मेंद्र गुर्जर के माध्यम से जमानत के लिए याचिकाएं दायर की थी। उनका कहना था कि वे लंबे समय से जेल में हैं और प्रकरण की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगने की आशंका है। ऐसे में उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने एक जुलाई को इन याचिकाओं पर अंतिम बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था जो मंगलवार को जारी हुआ। नौ पेज के फैसले में कोर्ट ने हरभजनसिंह को लेकर तल्ख टिप्पणी की है।

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कोर्ट ने माना कि उसने अपने पद का दुरुपयोग किया और आरोपित महिलाओं को विलासिता की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि उच्च पद पर बैठे अधिकारी के लिए सत्यनिष्ठा, नैतिकता और इमानदारी अनिवार्य गुण हैं। उच्च पद पर बैठे व्यक्ति को जीवनभर इन गुणों को बनाए रखना होता है, लेकिन अगर आप इसे छोड़ देते हैं तो आप खुद ही दोषी हैं।

ये तर्क रखे गए आरोपितों की तरफ से

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