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Guest Teacher Child Care Leave: संविदा महिला कर्मचारी को CCL न देने पर राज्य शिक्षा केंद्र संचालक पर 50 हजार का व्यक्तिगत जुर्माना

जबलपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: विभागीय परिपत्र कोर्ट के आदेश से ऊपर नहीं, संविदा कर्मचारियों को भी मिलेगी 240 दिन की चाइल्ड केयर लीव

Guest Teacher Child Care Leave: संविदा महिला कर्मचारी को CCL न देने पर राज्य शिक्षा केंद्र संचालक पर 50 हजार का व्यक्तिगत जुर्माना

जबलपुर: सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अनदेखी करना राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह को भारी पड़ गया। हाई कोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारी का बाल देखभाल अवकाश (Child Care Leave – CCL) आवेदन खारिज करने वाले विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने संचालक पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना भी ठोका है।

न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ कहा कि कोई भी विभागीय परिपत्र (Circular) अदालती आदेशों से ऊपर नहीं हो सकता।

“9वीं बार कोर्ट की शरण में याचिकाकर्ता” – प्रशासनिक मनमानी पर फटकार

हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता आयशा शेख की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने पक्ष रखा:

  • प्रशासनिक हठधर्मिता: अधिवक्ता ने पीठ को अवगत कराया कि पीड़िता को अपने हक के लिए 9वीं बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है, जो साफ तौर पर प्रशासनिक मनमानी को दर्शाता है।

  • परिपत्र का गलत हवाला: राज्य शिक्षा केंद्र ने 16 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग के 22 जुलाई 2023 के परिपत्र का हवाला देते हुए महिला कर्मचारी का छुट्टी का आवेदन खारिज कर दिया था।

कानून क्या कहता है? (CCL के नियम)

अदालत ने सुनवाई के दौरान नियमों को स्पष्ट करते हुए कहा:

  1. 730 दिनों का प्रावधान: मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम, 1977 के नियम 38-सी के तहत महिला सरकारी कर्मचारियों को 730 दिनों की बाल देखभाल छुट्टी का अधिकार है।

  2. संविदा कर्मचारी भी हकदार: संविदा महिला कर्मचारी भी अपने दो बच्चों की देखभाल के लिए 240 दिनों की छुट्टी की पूरी हकदार हैं।

  3. अदालत की सख्त टिप्पणी: हाई कोर्ट ने दोहराया कि “न्यायालय कानून का व्याख्याकार है और उसकी व्याख्या अंतिम होती है। विभागीय परिपत्र न्यायिक आदेशों का उल्लंघन नहीं कर सकते।”

हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

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