Site icon Yashbharat.com

IRCTC रेलवे का हरित कदम: वंदे भारत, शताब्दी और राजधानी ट्रेनों में अब बायोडिग्रेडेबल थालियों में मिलेगा भोजन

images 49

भोपाल। IRCTC रेलवे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सफर के साथ-साथ अब पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार सेवाएं देने की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रहा है। आईआरसीटीसी ने मार्च से वंदे भारत, शताब्दी और बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस में भोजन परोसने के लिए एल्युमिनियम फॉयल की जगह बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग का निर्णय लिया है।

फल-सब्जियों के छिलकों से तैयार होंगी थालियां

आईआरसीटीसी के पीआरओ एके सिंह के अनुसार नई थालियां फल-सब्जियों के छिलकों, कागज और अन्य प्राकृतिक सामग्री से बनाई जाएंगी। उपयोग के बाद ये थालियां 3 से 6 महीने में पूरी तरह मिट्टी में मिल जाती हैं, जबकि प्लास्टिक या एल्युमिनियम से बने उत्पादों को नष्ट होने में सैकड़ों साल लग जाते हैं।

कचरे में बड़ी कमी

इस फैसले से केवल इन तीन प्रीमियम ट्रेनों में ही हर महीने लगभग 50 हजार एल्युमिनियम थालियों की खपत समाप्त होगी। साथ ही 300 किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी, जिससे रेलवे का कार्बन फुटप्रिंट घटेगा।

माइक्रोप्लास्टिक से मिलेगी राहत

विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक समय के साथ टूटकर माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाता है, जो पानी, मिट्टी और भोजन के जरिए मानव शरीर तक पहुंचकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके विपरीत बायोडिग्रेडेबल थालियों से न तो माइक्रोप्लास्टिक बनता है और न ही कोई जहरीला रसायन निकलता है।

पर्यावरण पर कम दबाव

इन थालियों के निर्माण और निस्तारण में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम होता है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव घटता है। रेलवे का यह कदम ‘ग्रीन इंडिया’ अभियान की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। आईआरसीटीसी के इस फैसले से न केवल यात्रियों को पर्यावरण-अनुकूल सेवा मिलेगी, बल्कि रेलवे की छवि भी एक जिम्मेदार और सतत विकास की ओर बढ़ने वाले संस्थान के रूप में और मजबूत होगी।

Exit mobile version