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Good News: WCR के सभी रेलखंड हुए विद्युतीकृत, रेलवे को होगा बंपर फायदा

05 10 2020 rail cattle 2020105 215646

कटनी। पश्चिम मध्य रेलवे की 3012 किलोमीटर की पूरी रेल लाइन अब विद्युतीकृत है। रेल पथ के सौ प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य को हासिल करने वाला पमरे देश का पहला रेल जोन है। कोटा-चित्तौडगढ़़ के बीच श्रीनगर-जलंधरि रेलखंड के 23 किमी के इलेक्ट्रिफिकेशन कार्य को पूरा करने के साथ ही यह रिकॉर्ड बन गया है। इस रेलखंड  पर 29 मार्च को सीआरएस ने जांच के बाद बिजली का इंजन दौड़ाने की अनुमति दी है।

इस उपलब्धि के बारे में गुरुवार को पमरे महाप्रबंधक शैलेन्द्र कुमार सिंह ने जानकारी दी। वर्चुअल मीट में महाप्रबंधक ने बताया कि विद्युतीकृत रेल पथ के कारण ट्रेनों की गति बढ़ेगी। इससे यात्रा का समय कम होगा। रेलवे के डीजल पर प्रति वर्ष खर्च होने वाले लगभग 100 करोड़ रुपए की बचत होगी। इस दौरान पमरे मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी राहुल जयपुरियार, जनसम्पर्क अधिकारी आइ ए सिद्दकी उपस्थित थे।

चार साल पहले तक आधा रूट ही था विद्युतिकृत

1986.87-544-544-नागदा-मथुरा-18 प्रतिशत

1988.89-150-694-बीना-भोपाल-23 प्रतिशत

1989.90-100-794-भोपाल-इटारसी-26 प्रतिशत

1992.93-283-1277-बीना-कटनी-42 प्रतिशत

2016.17-97-1695-इटारसी-पिपरिया-56 प्रतिशत

तेजी से हुआ काम और अब लक्ष्य पूरा

वर्ष-विद्युतीकरण (किमी में)-विद्युतीकृत कुल मार्ग-लागत(रूपए में)-प्रतिशत में

2017.18-178-1873-254.71 करोड़-62.14

2018.19-296-2169-423.58 करोड़-72

2019.20-357-2526-510.87 करोड़-83.80

2020.21-486-3012-695.47 करोड़-100

विद्युतीकरण में हरसाल हुई प्रगति

-वर्ष 2017.18 में पिपारिया-जबलपुर खंड (178 किमी)।

-वर्ष 2018.19 में जबलपुर-कटनी, सगमा-मानिकपुर, कटनी-खन्नाबंजारी, विजयपुर-चचैड़ा बीना गंज एवं गुना-बदरवास खंड (296 किमी)।

-वर्ष 2019.20 में सतना-सगमा, सतना-रीवा, खन्नाबंजारी-मझौली, पाचोर रोड-चाचैड़ा बीनागंज एवं बदरवास-शिवपुरी खंड (357 किमी)।

-वर्ष 2020.21 में कटनी-सतना, पाचोर रोड-मक्सी, मझौली-मेहदीया, शिवपुरी-ग्वालियर एवं गुर्ला-चंदेरिया खंड (486 किमी)।

रेलवे को होगा बहुत फायदा

-मालगाडिय़ों की औसत गति 30 किमी प्रति घंटा थी। औसत गति बढ़कर 56.76 किमीण् प्रति घंटा हुई।

-यात्री ट्रेनें पहले 80-100 किमी प्रतिघंटा की गति से चलती थी। यह बढ़कर 130 किमी प्रतिघंटा हुई।

-पहले 33 ट्रेनों में इंजन बदलने पड़ते थे। ये अब नहीं करना पड़ता। इससे ट्रेनों की गति में वृद्धि हुई है।

-इंजन बदलने में लगने वाले समय में कमी आने के कारण ट्रेनों की समय-सारिणी में समय कम हुआ है।

-इलेक्ट्रिक इंजन की रखरखाव लागत कम। इंजन ना बदलने से क्रू की बीट व उनकी उपलब्धता बढ़ेगी।

-विद्युतीकरण होने से रेल परिचालन सुगम। आयात होने वाले डीजल में कमी आएगी। प्रदूषण कम होगा।

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