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Global Market Shock: भारत के चीनी निर्यात रोकने से दुनिया भर में मची खलबली, न्यूयॉर्क से लंदन तक उछले दाम; जानें घरेलू बाजार पर असर

Global Market Shock: भारत के चीनी निर्यात रोकने से दुनिया भर में मची खलबली, न्यूयॉर्क से लंदन तक उछले दाम; जानें घरेलू बाजार पर असर

Global Market Shock: भारत के चीनी निर्यात रोकने से दुनिया भर में मची खलबली, न्यूयॉर्क से लंदन तक उछले दाम; जानें घरेलू बाजार पर असर

Global Market Shock: भारत के चीनी निर्यात रोकने से दुनिया भर में मची खलबली, न्यूयॉर्क से लंदन तक उछले दाम; जानें घरेलू बाजार पर असर,  घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और देश में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने बुधवार को चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह रोक 30 सितंबर 2026 या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने चीनी को अब ‘निषिद्ध’ (Prohibited) श्रेणी में डाल दिया है।

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किन-किन उत्पादों पर लागू होगा प्रतिबंध?

सरकार का यह आदेश कच्ची (Raw), सफेद (White) और परिष्कृत (Refined) सभी प्रकार की चीनी पर लागू होगा। हालांकि, विशेष द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के तहत यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका को किए जाने वाले चीनी निर्यात पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

प्रतिबंध लगाने के पीछे की 3 बड़ी वजहें

 अल नीनो (Al Nino) मौसम की स्थिति के कारण देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में गन्ने की पैदावार कमजोर हुई है। मानसून प्रभावित होने से अगले सीजन में चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमानों से भी कम रहने का जोखिम बढ़ गया है। देश में चीनी का उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष घरेलू खपत से कम रहने की उम्मीद है, जिससे त्योहारों के सीजन में किल्लत हो सकती थी। सरकार का मुख्य उद्देश्य स्थानीय बाजारों में चीनी की आसमान छूती कीमतों को रोकना और आम जनता को राहत देना है।

वैश्विक बाजार पर क्या होगा असर?

ब्राजील के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है। भारत के इस फैसले से वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है प्रतिबंध की घोषणा के तुरंत बाद न्यूयॉर्क कच्ची चीनी वायदा में 2 फीसदी से अधिक और लंदन सफेद चीनी वायदा में 3 फीसदी का उछाल देखा गया। भारत के पीछे हटने से अब ब्राजील और थाईलैंड जैसे उत्पादक देशों को एशियाई और अफ्रीकी खरीदारों को अधिक चीनी बेचने का मौका मिलेगा।

पाइपलाइन में मौजूद शिपमेंट को मिलेगी कुछ शर्तें के साथ राहत:

सरकार ने पहले मिलों को 1.59 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, जिसमें से करीब 6 लाख टन भेजी जा चुकी है। बचे हुए अनुबंधों के लिए सरकार ने कुछ नियम तय किए हैं: यदि अधिसूचना जारी होने से पहले जहाज पर चीनी की लोडिंग शुरू हो चुकी थी, तो उसे अनुमति मिलेगी। यदि शिपिंग बिल दाखिल हो चुका था और जहाज भारतीय बंदरगाह पर आ चुका था, तो निर्यात हो सकेगा। यदि चीनी सीमा शुल्क (Customs) को सौंपी जा चुकी थी, तो भी शिपमेंट को मंजूरी मिलेगी। हालांकि, मुंबई के व्यापारियों का कहना है कि फरवरी में मिले अतिरिक्त कोटे के कारण कई निर्यातकों को अब अपने ऑर्डर पूरे करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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