Tuesday, May 12, 2026
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संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए माताओं ने हर रखा हलषठ का व्रत किया पूजन

संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए माताओं ने हर रखा हलषठ का व्रत किया पूजन

कटनी- हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मोत्सव के रूप में हलछठ का पर्व मनाया जाता है. यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत में मनाया जाता है. हरछठ को ललही छठ और बलराम जयंती भी कहते हैं भगवान बलराम के हाथ में शस्त्र के रूप हल और मूसल होता है जो कि कृषि से जुड़े कार्यों के लिए होता है. इस कारण से हलषष्ठी और हरछठ के नाम से जाना जाता है. इस त्योहार में माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संपन्नता के लिए व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं. इसमें जुताई से पैदा होने वाला किसी भी प्रकार को कोई भी अन्न नहीं ग्रहण किया जाता है संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए माताएं हर वर्ष हलषठ का व्रत रखती हैं और पूजा-आराधना की आज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सूर्यदेव को जल अर्पित करते हुए व्रत का संकल्प लिया महिलाएं महुए के पेड़ का दातुन भी करती हैं फिर एक खास तरह का पूजा स्थल पर गंगाजल से शुद्ध करके और एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं. चौकी पर भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की मूर्ति या तस्वीर रखे कर  हलषष्ठी पूजन के लिए चंदन, फूल, माला, रोली, अक्षत, दूर्वा, तुलसी, फल, मिठाई, महुआ और पसई का चावल (बिना हल से उगाया गया चावल) शामिल करें. इस पूजा में भैंस के दूध से बना दही और घी उपयोग करें, गाय के दूध का इस्तेमाल नहीं करना होता है

हलछठ के दो दिन बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

रक्षाबंधन के छठे दिन हलषष्ठी और इसके दो दिन बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा. इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था. इस दिन रात के 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. जिसमें बाल गोपाल को पंचामृत से अभिषेक, नए वस्त्र और माखन-मिश्री का भोग लगाय जाता है l

Rohit Sen

15 वर्षों से प्रिंट एवं डिजीटल मीडिया में कार्य का अनुभव वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में जिला प्रतिनिधि