FMCG Price Hike: मिडिल ईस्ट संकट की मार, अब महंगे होंगे साबुन, तेल, बिस्किट और मैगी; डाबर-मैरिको ने बढ़ाए दाम, HUL और नेस्ले भी तैयारी में। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण शुक्रवार को देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर तक का तगड़ा इजाफा हुआ था। इस बढ़ोतरी ने न सिर्फ आम आदमी की जेब पर डाका डाला है, बल्कि देश की बड़ी-बड़ी उपभोक्ता सामान (FMCG) बनाने वाली कंपनियों की भी टेंशन बढ़ा दी है। ट्रांसपोर्टेशन, शिपिंग और डिस्ट्रीब्यूशन लागत (लॉजिस्टिक्स कॉस्ट) बढ़ने के कारण अब पैकेटबंद खाने-पीने की चीजें, साबुन, तेल और रोजमर्रा के घरेलू सामान महंगे होने जा रहे हैं।
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डाबर और मैरिको ने 2 से 5% तक बढ़ाए दाम
बढ़ती लागत का बोझ कंपनियों ने अब धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है:
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डाबर इंडिया (Dabar India): कंपनी ने अपने अलग-अलग प्रोडक्ट्स की कीमतों में पहले ही 4 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है। डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं कि इस वित्त वर्ष में 10% तक महंगाई का दबाव रह सकता है, जिससे आगे भी दाम बढ़ाए जा सकते हैं।
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मैरिको (Marico): पैराशूट और सफोला जैसे ब्रांड्स बनाने वाली इस कंपनी ने भी लागत की भरपाई के लिए चुपके से अपने कुछ उत्पादों के दाम 2 से 5 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं।
पार्ले, ब्रिटानिया और HUL ने दिए बड़े संकेत
बिस्किट और घरेलू उत्पाद बनाने वाली दिग्गज कंपनियां भी अब पीछे नहीं हैं:
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पार्ले प्रोडक्ट्स: कंपनी के मुख्य मार्केटिंग अधिकारी मयंक शाह के मुताबिक, अब कीमतों में बढ़ोतरी होना बिल्कुल तय लग रहा है, बस इस बात पर मंथन चल रहा है कि दाम कितने बढ़ाए जाएं।
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हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और ब्रिटानिया: देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी HUL (लक्स, सर्फ एक्सेल बनाने वाली) और ब्रिटानिया ने अपनी अर्निंग कॉल में साफ कर दिया है कि अगर तेल के दाम के कारण महंगाई का यह दबाव जारी रहा, तो वे कीमतों में बढ़ोतरी करने से पीछे नहीं हटेंगे।
दाम नहीं बढ़े तो घट जाएगा पैकेट का वजन (Grammage Cut)
नेस्ले इंडिया (Nestle India) के एमडी मनीष तिवारी ने कहा है कि कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय हालातों पर उनकी बारीक नजर है और कीमतों में सीधे बढ़ोतरी करना उनका आखिरी विकल्प होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पेट्रोल-डीजल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो कंपनियां ‘ग्रामेज कट’ (Grammage Cut) का सहारा लेंगी। यानी उत्पाद की कीमत तो वही रहेगी (जैसे ₹5 या ₹10 का पैकेट), लेकिन पैकेट के अंदर मिलने वाले सामान का वजन (जैसे बिस्किट या नूडल्स की मात्रा) कम कर दिया जाएगा।
ग्रामीण इलाकों में मांग घटने का डर
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां पहले से ही 8-10% महंगाई के दबाव से जूझ रही थीं। यह संकट ऐसे समय पर आया है जब पिछले साल जीएसटी (GST) दरों में कटौती के बाद बाजार में सुधार दिखने लगा था। अब तेल की इस महंगाई के कारण विशेष रूप से ग्रामीण भारत (Rural Markets) में सामानों की डिमांड घटने का बड़ा रिस्क पैदा हो गया है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है।

