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नवरात्र में चरम पर आस्था, लेकिन चरमराई शहर की यातायात व्यवस्था: नो-एंट्री के बावजूद बेखौफ दौड़ रहीं बसें, बड़े हादसे की आशंका

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नवरात्र में चरम पर आस्था, लेकिन चरमराई शहर की यातायात व्यवस्था: नो-एंट्री के बावजूद बेखौफ दौड़ रहीं बसें, बड़े हादसे की आशंका

विशेष संवाददाता । जबलपुर

जबलपुर: नवरात्र के पावन अवसर पर समूचा जबलपुर शहर भक्ति और उत्साह के रंगों में रंगा हुआ है। शाम ढलते ही शहर के प्रमुख दुर्गा पंडालों, आकर्षक झांकियों और भंडारा स्थलों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। विशेष रूप से रात 8:00 बजे से 12:00 बजे के बीच शहर के अंदरूनी बाजारों और सड़कों पर जनसैलाब देखने को मिल रहा है। लेकिन इस आस्था के सैलाब के बीच शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

नो-एंट्री नियमों की धज्जियां, शहर के भीतरी मार्गों पर दौड़ रहीं बसें

प्रशासन द्वारा नवरात्र के दौरान शहर के भीतरी और संकरे इलाकों में भारी वाहनों एवं यात्री बसों के प्रवेश पर नो-एंट्री लागू की गई है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि यात्री बसें और कमर्शियल वाहन बेखौफ होकर भीड़भाड़ वाले मुख्य मार्गों पर आवाजाही कर रहे हैं।

पैदल दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं और बच्चों के लिए ये बेकाबू वाहन हर पल जानलेवा साबित हो रहे हैं। सड़कों पर नो-एंट्री पॉइंट पर पर्याप्त पुलिस बल की कमी और लापरवाही के कारण बस चालक मनमानी कर रहे हैं।

ग्वालियर हादसे से भी सबक नहीं, प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल

हाल ही में ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के समीप एक अनियंत्रित ट्रक द्वारा 16 श्रद्धालुओं को रौंदे जाने की दर्दनाक घटना घटी थी। इसके अलावा जबलपुर के सिहोरा क्षेत्र में भी बीते समय नो-एंट्री में घुसी बस द्वारा भंडारे में श्रद्धालुओं को टक्कर मारने का हादसा हो चुका है।

इतनी बड़ी त्रासदियों के बाद भी स्थानीय यातायात पुलिस और जिला प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। भीड़ वाले इलाकों में गति सीमा और भारी वाहनों के प्रवेश पर कड़ाई से अमल न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।

“रात के समय जब सड़कों पर बच्चों और महिलाओं की सबसे ज्यादा भीड़ होती है, तब तेज रफ्तार बसें और भारी गाड़ियाँ बगल से गुजरती हैं। पुलिस सिर्फ खानापूर्ति कर रही है, नो-एंट्री का कहीं पालन नहीं दिख रहा।”

— स्थानीय निवासी एवं श्रद्धालु

जन-सुरक्षा के लिए उठ रहीं प्रमुख माँगें

शहर के नागरिकों और श्रद्धालु संघों ने प्रशासन से तत्काल कड़े कदम उठाने की माँग की है:

रात 8 बजे से 12 बजे के संवेदनशील समय के दौरान शहर के अंदर भारी वाहनों व बसों की एंट्री पर शत-प्रतिशत रोक लगाई जाए। मुख्य एंट्री पॉइंट्स (जैसे रानीताल, गढ़ा फाटक, कमानिया, कटंगी रोड) पर स्थायी बैरिकेडिंग कर पुलिस बल तैनात किया जाए।नो-एंट्री तोड़ने वाले और नशे में वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) और परमिट रद्द करने की सीधी कार्रवाई हो। दर्शन स्थलों और भंडारा परिसरों से दूर पार्किंग तय की जाए ताकि मुख्य मार्गों पर जाम न लगे। नवरात्र में चरम पर आस्था, लेकिन चरमराई शहर की यातायात व्यवस्था: नो-एंट्री के बावजूद बेखौफ दौड़ रहीं बसें, बड़े हादसे की आशंका

समय रहते यदि यातायात प्रबंधन को दुरुस्त नहीं किया गया, तो श्रद्धालुओं की आस्था पर लापरवाही का भारी साया मंडराता रहेगा।

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