EPFO, EPF, PPF और GPF तीनों कर्मचारियों के लिए काम की योजनाएं हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, (EPFO) कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) ना केवल नौकरी की अवधि के दौरान सुविधाएं व आर्थिक सुरक्षा देते हैं, बल्कि ये भविष्य के लिए निवेश का भी एक बेहतर विकल्प हैं। यहां हम आपको तीनों में फर्क के अलावा इनमें निवेश के फायदेमंद विकल्प की जानकारी बता रहे हैं।
EPFO : यह भविष्य निधि संगठन है जो देश भर में सरकारी व निजी नौकरी करने वालों के लिए काम करता है। ये कर्मचारी इसके सदस्य कहलाते हैं और ईपीएफओ कर्मचारियों के नियोक्ता संस्थान, कंपनी को भी नियंत्रित करता है। पीएफ यानी प्रोडिडेंट फंड PF (Provident Fund) इसी का एक अंग है। कर्मचारी के वेतन में से होने वाली प्रतिमाह कटौती में नियोक्ता का अंश शामिल रहता है और उसके बाद वह पैसा पीएफ खाते में जमा होता है। कर्मचारी रिटायर होने के बाद या सेवा काल में ही जरूरत पड़ने पर इस राशि को निकाल सकता है।
EPF : इसे कर्मचारी भविष्य निधि कहा जाता है। यह योजना केवल वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के लिए ही लागू होती है। यह बचत योजना एक प्रकार से अनिवार्य है। यह केवल उसी कंपनी या संस्थान पर लागू होती है जहां पर कर्मचारियों की संख्या 20 से ज्यादा हो और कर्मचारियों का वेतन तय न्यूनतम राशि से अधिक हो। EPF में निवेश करने के लिए बेसिक यानी मूल वेतन का 12 प्रतिशत तक ईपीएफ खाते में काटकर जमा किया जाता है। जब आपका EPF मैच्योर हो जाता है तो उस समय आपको मिलने वाली राशि पर सिर्फ तभी छूट मिलेगी जब आपके पास न्यूनतम 5 साल नौकरी का रिकॉर्ड हो। EPF पर जो ब्याज दर तय होती है उसे प्रति वर्ष EPFO द्वारा घोषित किया जाता है। वर्ष 2017-18 के लिए इसे 8.55 फीसद सालाना के दर के रूप में तय किया गया था। EPF खाते में पांच साल की लॉक-इन अवधि होती है।
PPF : पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड या लोक भविष्य निधि मुख्य रूप से बैंकों एवं डाकघरों द्वारा चलाई जाने वाली योजनाएं हैं। PPF को EEE TAX भी दर्जा दिया गया है। यानी आपका पीपीएफ में निवेश किया गया पैसा सभी प्रकार के कर से मुक्त है। इसका लाभ लेने के लिए वेतनभोगी कर्मचारी होने की अनिवार्यता नहीं है। सीमित आय वाले व्यक्ति भी इसके माध्यम से लघु बचत योजना में अपना पैसा निवेश कर सकते हैं। PPF एक प्रकार की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना है। एक वित्तीय वर्ष में इसमें आप न्यूनतम जमा राशि 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा कर सकते हैं। इस योजना में आप अपनी सुविधानुसार या तो एकमुश्त अथवा किश्तों में योगदान कर सकते हैं। PPF की ब्याज दरें दस वर्ष के शासकीय बॉन्ड यील्ड एवं तिमाही के आधार पर बदलती हैं। वर्ष 2018-19 की अंतिम तिमाही में PPF की ब्याज दर 8 फीसद की दर से दी जा रही है। PPF में 15 साल की लॉक-इन अवधि होती है।
GPF: GPF यानी जनरल प्रोविडेंट फंड भी एक प्रकार का प्रोविडेंट फंड ही है। वर्तमान में इस फंड में सिर्फ शासकीय कर्मचारी ही पैसे निवेश कर सकते हैं। वह कर्मचारी चाहे तो अवधि से पहले ही बीच अवधि में धनराशि को जरुरत होने पर निकाल सकता है। इस योजना में खास बात यह है कि इसमें जमा धन राशि केवल रिटायरमेंट के समय ही शासकीय कर्मचारी को मिल पाती है।
