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भीषण गर्मी में बच्चों की जान से खेल रहा शिक्षा विभाग, स्कूलों की टाइमिंग पर अभिभावकों में भारी आक्रोश

कटनी(YASHBHARAT.COM)। एक समय था जब वार्षिक परीक्षा का अंतिम पेपर होते ही स्कूली बच्चे घर आकर स्कूली बैग एक जगह रख कर पूरी गर्मी मस्ती करते थे। कोई दादा दादी के पास जाता था तो कोई नाना नानी के पास जाकर पूरी गर्मी मौज मस्ती करता था। वही कई बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में परिवार के साथ घूमने का प्लान करते थे और उसे पूरा भी कर लेते थे लेकिन मौजूदा व्यावसायिक शिक्षा ने पूरे मायने ही बदल कर रख दिए हैं। अब भीषण गर्मी में भी उनको भारी भरकम स्कूली बैग लेकर पसीने से तर बत्तर होते हुए शिक्षा ग्रहण करने मजबूर होना पड़ रहा है। बहरहाल प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी भीषण गर्मी के बीच नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत तो कर दी गई, लेकिन शिक्षा विभाग की लापरवाही अब सीधे मासूम बच्चों की सेहत पर भारी पड़ती नजर आ रही है। चिलचिलाती धूप और लगातार बढ़ते तापमान के बावजूद स्कूलों के समय में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। जिससे बच्चों को तपती दोपहर में स्कूल आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई स्कूलों में न पर्याप्त पेयजल व्यवस्था है और न ही बिजली की सुविधा। गर्म कमरों में बैठकर पढ़ाई करना बच्चों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। अभिभावकों का आरोप है कि एक ओर विभाग जॉयफुल लर्निंग की बात करता है, वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी में बच्चों को झुलसती परिस्थितियों में पढ़ाई कराई जा रही है। तेज गर्मी के कारण कई अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है। जो बच्चे स्कूल पहुंच भी रहे हैं, वे थकान, चक्कर और गर्मी से परेशान दिखाई दे रहे हैं। दोपहर करीब 2 बजे घर लौटते समय बच्चों को तेज धूप और लू का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों में भारी नाराजगी है।

मौसम विभाग की चेतावनी से बढ़ रही अभिभावकों की चिंता

उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग पहले ही आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की चेतावनी दे चुका है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की कम उपस्थिति के कारण स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई जगह सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

सुबह की पाली में लगे सभी स्कूल

अभिभावकों और नागरिकों ने मांग उठाई है कि सभी शासकीय एवं निजी स्कूलों का समय तत्काल बदलकर सुबह 7 बजे से 11 बजे किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में शिक्षा मिल सके।

कलेक्टर से संज्ञान लेकर हस्तक्षेप की मांग 

नाराज अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो जिला कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि प्रशासन को अब कागजी योजनाओं से बाहर निकलकर बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी। जॉयफुल लर्निंग के नाम पर बच्चों को झुलसती गर्मी में बैठाना आखिर किस तरह की शिक्षा व्यवस्था है। यह सवाल अब हर अभिभावक पूछ रहा है।

विदिशा में बदला स्कूलों का समय

कुछ क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी के कारण स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है, विदिशा में भी समय में बदलाव कर स्कूल सुबह 7:30 बजे से किए गए हैं।

 

एक नज़र यहां भी

 

भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान (हीटवेव) के बीच स्कूलों का संचालन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। जिससे हीट स्ट्रोक और निर्जलीकरण का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कुछ राज्यों ने समय में बदलाव कर सुबह 6:30 से 12:20 तक किया है या छत्तीसगढ़ सरकार जैसे क्षेत्रों में 20 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा की है।

भीषण गर्मी में स्कूली बच्चों के लिए जोखिम और स्थिति

स्वास्थ्य संबंधी खतरे:-अत्यधिक गर्मी में बच्चों को हीट स्ट्रोक, हीट क्रैम्प्स, और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) का सामना करना पड़ सकता है।

अवसंरचना का अभाव:- ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्कूलों में वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम (पंखा/एसी) की भारी कमी है, जिससे कक्षाएं भट्ठी की तरह तपने लगती हैं।

समय सीमा:- भीषण गर्मी के बावजूद कई स्कूल अभी भी चल रहे हैं, जिससे बच्चों की जान जोखिम में है।

सरकारी निर्णय:- छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी के कारण गर्मी की छुट्टी 1 मई के बजाय 20 अप्रैल 2026 से करने का फैसला लिया गया है।

एहतियाती उपाय:- भीषण गर्मी के दौरान बच्चों के लिए स्कूल के समय में बदलाव (सुबह जल्दी), पर्याप्त पीने के पानी की व्यवस्था और बच्चों को धूप से बचाने की आवश्यकता है।

 

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