Edible Oil Price Rise: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची पाम ऑयल की कीमतें, सोयाबीन तेल भी हुआ महंगा; जून में नहीं मिलेगी राहत। नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट के संकट और महंगे पेट्रोलियम पदार्थों के बीच अब आम आदमी की रसोई के बजट को एक और बड़ा झटका लगने जा रहा है। ग्लोबल मार्केट में खाद्य तेलों (Edible Oils) की कीमतों में एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। वैश्विक स्तर पर बायोफ्यूल (जैव ईंधन) की बढ़ती मांग के चलते इंटरनेशनल मार्केट में पाम ऑयल (Palm Oil) की कीमतें करीब दो हफ्तों के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
Edible Oil Price Rise: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची पाम ऑयल की कीमतें, सोयाबीन तेल भी हुआ महंगा; जून में नहीं मिलेगी राहत
मलेशियाई बाजार में इसके दाम 4,600 रिंग्गित (मलेशियाई मुद्रा) प्रति टन के आंकड़े को पार कर चुके हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट्स और मलेशियन पाम ऑयल बोर्ड (MPOB) का साफ कहना है कि वैश्विक समीकरणों को देखते हुए आगामी जून के महीने में भी कीमतों में नरमी आने के आसार बेहद कम हैं।
जून में भी क्यों नहीं घटेंगे दाम?
वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों की कुल सप्लाई में मलेशिया और इंडोनेशिया की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। हालांकि मार्च से अक्टूबर के बीच का समय पाम ऑयल के प्रोडक्शन (उत्पादन) के लिए पीक सीजन माना जाता है क्योंकि सूखा मौसम होने से कटाई आसान होती है। इस सीजनल बढ़त के चलते अप्रैल में मलेशिया का पाम ऑयल स्टॉक मामूली बढ़कर 2.31 मिलियन टन भी हुआ है, लेकिन इसके बावजूद कीमतें नीचे नहीं आ रही हैं।
MPOB का अनुमान: > मलेशियन पाम ऑयल बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून के महीने में कच्चे पाम ऑयल की कीमतें औसतन RM 4,400 प्रति टन के आसपास बेहद मजबूत स्थिति में टिकी रह सकती हैं। निचले स्तरों पर दोबारा शुरू हुई जोरदार चौतरफा खरीदारी ने कीमतों को नीचे आने से रोक दिया है।
अमेरिकी नीतियों और सोयाबीन तेल की महंगाई ने बिगाड़ दिया खेल
पाम ऑयल की कीमतों में आ रही इस ताजा तेजी के पीछे अमेरिकी और यूरोपीय देशों की बायोफ्यूल नीतियां सबसे बड़ा कारण हैं:
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रिकॉर्ड महंगा हुआ सोयाबीन तेल: अमेरिका में बायोफ्यूल सेक्टर की भारी मांग के चलते यूरोप में सोयाबीन तेल की कीमतें मई के मध्य में नवंबर 2022 के बाद के अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।
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प्रीमियम पर ट्रेड: वर्तमान में सोयाबीन तेल, रेपसीड तेल के मुकाबले US$145 प्रति टन और सूरजमुखी तेल की तुलना में US$45 प्रति टन के भारी प्रीमियम (महंगे दाम) पर बिक रहा है।
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पाम ऑयल की बढ़ी डिमांड: सोयाबीन तेल के मुकाबले पाम तेल करीब US$110 प्रति टन सस्ता बना हुआ है। सोयाबीन तेल के अत्यधिक महंगे होने के कारण अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब तेजी से पाम ऑयल की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं, जिससे इसकी मांग और कीमतें दोनों बढ़ गई हैं।
भारतीय खरीदारों के लिए पाम ऑयल अब भी ‘लाइफलाइन’
भारतीय बाजार और यहां के आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य तेलों (जैसे सोयाबीन और सनफ्लावर) के मुकाबले पाम ऑयल अब भी सबसे किफायती विकल्प बना हुआ है।
अर्जेंटीना के सोयाबीन तेल के मुकाबले मलेशियाई पाम ओलिन की कीमतें कम होने के कारण भारतीय आयातक (Importers) लगातार पाम ऑयल की खरीद को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
निर्यात के आंकड़े (मलेशिया):
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साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में मलेशिया का कुल पाम ऑयल एक्सपोर्ट 25.5 फीसदी बढ़कर 5.38 मिलियन टन पर पहुंच गया है, जो 2019 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
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हालांकि मार्च के मुकाबले अप्रैल में एक्सपोर्ट 14.3% घटा है, लेकिन इसके बावजूद कुल निर्यात मलेशिया के मासिक उत्पादन का 80% रहा, जो भारत सहित दुनिया भर में इसकी तगड़ी डिमांड को दर्शाता है।
असर: चूंकि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की इस मजबूती का असर आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों में पैक्ड खाने की चीजों, साबुन, शैम्पू और वनस्पति घी की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

