बेटा, थोड़ा और खा लो।”
”अरे, मेरा बच्चा कितना पतला हो गया है।”
”हम लोग खाते-पीते घर के है।”
अगर आप भारतीय परिवेश में बड़ी हुई हैं तो आपने अपनी मां को शायद यह बातें कहते सुना होगा। भारतीय मां और दादी को अपने बच्चों को खिलाना बेहद अच्छा लगता है भले ही उनका पेट भर चुका हो। मां को लगता है कि इससे वह अपना प्यार दिखा सकती हैं। क्या आपके घर में कुछ ऐसा ही देखने को मिलता हैं, अगर हां तो सावधान हो जाएं।
आपको इस बात का अहसास नहीं होगा कि इस तरह से अपने बच्चों को खिलाना उनमें unhealthy eating habits का कारण बन सकता है और वह बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं। The Times of India में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, 22 प्रतिशत भारतीय बच्चे मोटापे से ग्रस्त है। इस लेख में यह भी कहा गया है कि 1990 से 2014 के बीच, कम और मध्यम आय वाले देशों में अधिक वजन वाले बच्चों की संख्या दोगुनी होकर 7.5 मिलियन से 15.5 मिलियन हो गई है।
क्या आप भी अपने बच्चे को एक रोटी एक्स्ट्रा खिलाने की कोशिश में लगे रहते हैं तो आप जानते है कि इससे आपका बच्चा हेल्थी रहेगा
जंक फूड नहीं है कारण
अगर आपको लग रहा हैं कि यह समस्या बच्चों के जंक फूड और aerated drinks लेने से हो रही हैं तो हम आपको बता दें कि आप यहां पर गलत हो। भारत में सबसे बड़ी समस्या यह धारणा है कि घर का खाना (homemade food) बहुत healthy होता है। इसलिए मां रोटी पर ज्यादा घी लगाकर अपने बच्चों को देती है ताकी उनका बच्चा strong बनें। इसके अलावा वह अपने बच्चे को सभी तरह के unhealthy foods जैसे Indian sweets, fried snacks और चावल की items जैसे बिरयानी, पुलाव और fried rice खाने को देती हैं।
अपनी मां की भावना को मैं समझती हूं, इसलिए मैं इस विचारधारा का विरोध करने में आपकी मदद नहीं कर सकती हूं। क्योंकि मेरी मां ने खाना पकाने और खिलाने में अपनी लाइफ का बहुत अधिक समय बिताया है। जब हम छोटे थे, तब वह हमें खाना खिलाने की कोई कसर नहीं छोड़ती थी। यहां तक कि जब तक हम खाना नहीं खा लेते थे वह सोती भी नहीं थी। और occasionally तो वह हमारे चावल या रोटियों पर एक्सट्रा मक्खन भी लगा देती थी क्योंकि उनका मनाना था कि बच्चों को fatty foods खाने की जरूरत है।
मोटापा निकला परिणाम
परिणाम, यह हुआ कि आज में एक मोटी महिला के रूप में बड़ी हुई जो वजन कम करने में बहुत सी कठिनाइयों का सामना कर रही हूं। अब, जब मैं अपनी मां से पूछती हूं कि जब मैं बच्ची थी, तो आपने मुझे इतना खाना क्यों खाने के लिए दिया, तब वह कहती हैं कि ‘दूसरों की मम्मी ने भी ऐसा ही किया, लेकिन उनके बच्चे तो तेरी तरह मोटे नहीं हुए।’ हालांकि वह मोटी होने के लिए मुझे भी दोषी नहीं ठहराती हैं, लेकिन वह इस बात को मानने के लिए भी तैयार नहीं है कि मेरे मोटे होने में उसकी कोई गलती है।
लेकिन, जितना मैं जानती हूं, मैं इसके लिए अपनी मां को दोष नहीं दे सकती क्योंकि यह सब उन्होंने अपनी मां और दादी से सीखा। और जो महिला किचन में ज्यादा समय बिताती हैं उन्हें लगता है कि उनका बच्चा रोजाना delicious फूड खाएं। मेरी मां working woman लेकिन हां वह एक ऐसी मां है जिसको लगता था कि उसके बच्चे कभी भी भूखे ना रहें और कभी भी भूखे ना सोएं।
क्या आप भी अपने बच्चे को एक रोटी एक्स्ट्रा खिलाने की कोशिश में लगे रहते हैं तो आप जानते है कि इससे आपका बच्चा हेल्थी रहेगा
ज्यादतार भारतीय परिवारों में होता है ऐसा
ऐसा ज्यादतार भारतीय परिवारों में होता है जहां हेल्थ की जगह खाने को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन हमें तब महसूस होता है जब यह food habits लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों जैसी डायबिटीज या मोटापे को जन्म देती है। और इस whole process का सबसे कष्टप्रद हिस्सा तब होता है जब parents को अपने मोटे बच्चे को देखकर शर्म आती है। यह लगभग ऐसा हो गया जैसे कि अपने बच्चों को हेल्दी बनाने में उनकी कोई गलती नहीं है। मेरी अक्सर अपनी मां के साथ लड़ाई इस बात को लेकर होती है कि बचपन में तो ज्यादा खिलाया और अब मुझे मोटी देखकर आपको शर्म आती हैं।
