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DMF Rules 2026: बदल गए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) के नियम, अब 15 किमी के दायरे में खर्च होगी 70% राशि; सचिव आलोक सिंह के कड़े विधिक निर्देश

DMF Rules 2026: बदल गए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) के नियम, अब 15 किमी के दायरे में खर्च होगी 70% राशि; सचिव आलोक सिंह के कड़े विधिक निर्देश

DMF Rules 2026: बदल गए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) के नियम, अब 15 किमी के दायरे में खर्च होगी 70% राशि; सचिव आलोक सिंह के कड़े विधिक निर्देश

कटनी: मध्य प्रदेश में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) फंड की राशि से होने वाले विकास कार्यों की रूपरेखा अब पूरी तरह बदलने जा रही है। भारत सरकार के निर्देश पर ‘प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना’ के विधिक नियमों में बड़ा संशोधन किया गया है। इन संशोधित नियमों के सुचारू क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को खनिज संसाधन विभाग के सचिव श्री आलोक सिंह एवं संचालक श्री फ्रेंक नोबल ए ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को कड़े विधिक दिशा-निर्देश जारी किए।

DMF Rules 2026: बदल गए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) के नियम, अब 15 किमी के दायरे में खर्च होगी 70% राशि; सचिव आलोक सिंह के कड़े विधिक निर्देश

कटनी कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी कक्ष से कलेक्टर आशीष तिवारी, जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर और उपसंचालक खनिज रत्नेश दीक्षित इस महत्वपूर्ण बैठक में वर्चुअली जुड़े।

 14 मई 2026 को प्रकाशित हुआ नया राजपत्र; ये हैं नए विधिक मापदंड

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के नए नियमों के संबंध में 14 मई 2026 को राजपत्र (Gazette) में विधिक अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है। अब से होने वाले सभी कार्य इसी अधिसूचना के दायरे में होंगे:

  • त्रिज्यीय परिधि (Radius Limit) तय: नए नियमों के अनुसार, अब मुख्य खनिज की खदानों से 15 किलोमीटर की परिधि में आने वाले क्षेत्र को ‘प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित’ (Directly Affected) माना जाएगा। वहीं 25 किलोमीटर की परिधि वाले क्षेत्र को ‘अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित’ (Indirectly Affected) श्रेणी में रखकर विकास कार्य कराए जाएंगे।

  • 70% बजट प्रत्यक्ष प्रभावितों के लिए: जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) को होने वाली कुल वार्षिक प्राप्ति का न्यूनतम 70 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र (15 किमी की परिधि) में ही खर्च करना होगा।

 70:30 का नया वित्तीय विन्यास और सेक्टर्स का निर्धारण

संशोधित नियमावली के तहत फंड के आवंटन को दो मुख्य प्राथमिकताओं में विभाजित किया गया है:

  1. उच्च प्राथमिकता क्षेत्र (70% राशि): कुल बजट का 70 प्रतिशत हिस्सा पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होगा। इस बार विधिक रूप से उच्च प्राथमिकता क्षेत्र में आवास (Housing), कृषि (Agriculture) एवं पशुपालन (Animal Husbandry) के क्षेत्रों को भी अतिरिक्त रूप से शामिल किया गया है।

  2. अन्य प्राथमिकता क्षेत्र (30% राशि): शेष 30 प्रतिशत राशि अन्य बुनियादी ढांचागत विकास (इंफ्रास्ट्रक्चर) और संपर्क मार्गों के निर्माण पर खर्च की जा सकेगी।

 फंड ट्रांसफर पर पूरी तरह रोक, अनिवार्य होगा CAG ऑडिट

प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राजपत्र में कुछ बेहद कड़े वित्तीय प्रतिबंध भी लगाए गए हैं:

  • अक्षय निधि (Endowment Fund): जिन जिलों में डीएमएफ की वार्षिक प्राप्ति 10 करोड़ रुपये से अधिक है, वहां कुल प्राप्ति का 10 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से ‘अक्षय निधि’ के रूप में सुरक्षित रखना होगा।

  • अंतर-जिला ट्रांसफर प्रतिबंधित: भ्रष्टाचार और विसंगतियों को रोकने के लिए डीएमएफ की राशि का राज्य स्तर पर या किसी अन्य जिले में अंतरण (Transfer) पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। राशि केवल उसी जिले के विकास में खर्च होगी जहां से खनन राजस्व मिला है।

  • पंचवर्षीय मास्टर प्लान: अब हर जिले को डीएमएफ के कार्यों की 5 वर्षीय कार्ययोजना (Five Year Plan) तैयार करनी होगी, जिसे जिला खनिज प्रतिष्ठान के मण्डल द्वारा विधिक रूप से अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा।

  • चार्टर्ड एकाउंटेंट और CAG ऑडिट: सभी कार्यों और खर्चों का सीएजी (CAG) में सूचीबद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट और स्वयं कैग द्वारा कड़ा ऑडिट कराया जाएगा।

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