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ग्लोबल बाजार में भारतीय खिलौनों की मांग तेज: बड़े एक्सपोर्ट ऑर्डर पाने में ‘प्रोडक्शन कैपेसिटी’ बनी सबसे बड़ी चुनौती

ग्लोबल बाजार में भारतीय खिलौनों की मांग तेज: बड़े एक्सपोर्ट ऑर्डर पाने में 'प्रोडक्शन कैपेसिटी' बनी सबसे बड़ी चुनौती

ग्लोबल बाजार में भारतीय खिलौनों की मांग तेज: बड़े एक्सपोर्ट ऑर्डर पाने में 'प्रोडक्शन कैपेसिटी' बनी सबसे बड़ी चुनौती

ग्लोबल बाजार में भारतीय खिलौनों की मांग तेज: बड़े एक्सपोर्ट ऑर्डर पाने में ‘प्रोडक्शन कैपेसिटी’ बनी सबसे बड़ी चुनौती

विशेष रिपोर्ट (यशभारत.कॉम): वैश्विक बाजार में भारतीय खिलौना निर्माताओं (Indian Toy Manufacturers) के प्रति विदेशी खरीदारों की दिलचस्पी में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। हालांकि, इस बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय अवसरों को बड़े एक्सपोर्ट ऑर्डर्स में बदलने के लिए भारतीय खिलौना कंपनियों को अपनी विनिर्माण और उत्पादन क्षमता (Production Capacity) में तेजी से विस्तार करना होगा।

जर्मनी स्थित को-ऑपरेटिव ट्रेड फेयर ऑर्गनाइजर Spielwarenmesse eG के एग्जीक्यूटिव बोर्ड मेंबर क्रिश्चियन उलरिख के अनुसार, खासतौर पर देश की छोटी कंपनियों के सामने बड़े ऑर्डर्स को समय पर पूरा करने की क्षमता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

नूर्नबर्ग टॉय फेयर में भारत की मजबूत उपस्थिति

क्रिश्चियन उलरिख ने जानकारी दी कि जर्मनी के नूर्नबर्ग में आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे बड़े टॉय ट्रेड फेयर में भारतीय कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। आगामी संस्करण में भारत की लगभग 50 से 60 कंपनियों के भाग लेने की संभावना है। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक ब्रांड्स भारत को खिलौनों की सोर्सिंग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल विदेशी खरीदारों की रुचि होना ही काफी नहीं है। Walmart जैसे विश्वस्तरीय रिटेलर्स यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भारतीय सप्लायर लगातार बड़ी मात्रा में और तय गुणवत्ता मानकों के साथ खिलौनों की निर्बाध सप्लाई कर सकते हैं या नहीं।

MSME सेक्टर और उत्पादन क्षमता की बाधाएं

‘Roedl’ के पार्टनर और इनडायरेक्ट टैक्स सर्विस के प्रमुख अतिश लड्डा ने भी उत्पादन क्षमता को भारतीय खिलौना उद्योग की सबसे बड़ी बाधा बताया है।

आगे की राह

वैश्विक खिलौना बाजार में भारत को अपनी मजबूत हिस्सेदारी दर्ज कराने के लिए छोटी और मध्यम खिलौना कंपनियों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक सप्लाई चेन नेटवर्क विकसित करने और उत्पादों की गुणवत्ता में निरंतरता बनाए रखने पर विशेष निवेश करना होगा। ग्लोबल बाजार में भारतीय खिलौनों की मांग तेज: बड़े एक्सपोर्ट ऑर्डर पाने में ‘प्रोडक्शन कैपेसिटी’ बनी सबसे बड़ी चुनौती

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