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इंसानों संग 130 साल रहा मगरमच्छ: बेमेतरा के ‘गंगाराम’ की अनोखी कहानी अब NCERT में, देश भर के बच्चे पढ़ेंगे मिसाल

छत्तीसगढ़ के 'गंगाराम' की अमर कहानी अब पूरे देश के बच्चे पढ़ेंगे: बेमेतरा के बावा मोहतरा गांव में 130 साल तक इंसानों संग रहा मगरमच्छ, NCERT ने नए सिलेबस में दी जगह

इंसानों संग 130 साल रहा मगरमच्छ: बेमेतरा के ‘गंगाराम’ की अनोखी कहानी अब NCERT में, देश भर के बच्चे पढ़ेंगे मिसाल

विशेष संवाददाता, yashbharat.com बेमेतरा/नई दिल्ली। आमतौर पर मगरमच्छ का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं और लोग उससे दूर भागते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का बावा मोहतरा गांव इंसान और वन्यजीव के अनूठे प्रेम की ऐसी कहानी सुनाता है जो दुनिया में शायद ही कहीं देखने को मिले। इस गांव के लोगों ने मगरमच्छ से डरने के बजाय उसे अपने परिवार का हिस्सा और गांव का रक्षक माना। अब इंसान और प्रकृति के बीच अटूट भरोसे की इस अनोखी मिसाल को NCERT ने अपने नए पाठ्यक्रम (Curriculum) में शामिल किया है, ताकि देशभर के स्कूली बच्चे इस प्रेरणादायक रिश्ते से सीख ले सकें।

130 वर्षों तक गांव की पहचान रहा ‘गंगाराम’

बावा मोहतरा गांव के बीचों-बीच स्थित एक तालाब में ‘गंगाराम’ नाम का मगरमच्छ लगभग 130 वर्षों तक रहा। ग्रामीणों के मुताबिक, गंगाराम केवल एक जलीय जीव नहीं बल्कि गांव का अभिन्न अंग था। समय के साथ गांव की कई पीढ़ियां बदल गईं, बच्चे बड़े होकर बुजुर्ग हो गए, लेकिन गंगाराम हमेशा उसी तालाब में ग्रामीणों के साथ घुल-मिलकर रहा।

न कभी डर, न कभी हमला: परिवार जैसा रिश्ता

ग्रामीण गंगाराम को भगवान का रूप और अपने परिवार का सदस्य मानते थे। तालाब में जिस वक्त लोग नहाते थे या मवेशियों को पानी पिलाते थे, गंगाराम भी वहीं उनके आसपास तैरता रहता था। इतने लंबे इतिहास में गंगाराम ने कभी किसी ग्रामीण या जानवर पर हमला नहीं किया। गांव के लोग खुशी-खुशी उसे खाना खिलाते थे और उसकी देखभाल करते थे। इंसानों संग 130 साल रहा मगरमच्छ: बेमेतरा के ‘गंगाराम’ की अनोखी कहानी अब NCERT में, देश भर के बच्चे पढ़ेंगे मिसाल

“गंगाराम हमारे लिए कभी खतरा नहीं रहा। वह हमारे गांव का बुजुर्ग और रक्षक था। इंसान और जंगली जानवर के बीच ऐसा प्यार पूरी दुनिया के लिए मिसाल है।”

— बावा मोहतरा के ग्रामीण

NCERT के पाठ्यक्रम में क्यों मिली जगह?

NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) ने इस कहानी को अपने नए सिलेबस में शामिल करके बच्चों को यह सिखाने की कोशिश की है कि प्रकृति और जीवों के प्रति अगर मन में डर और हिंसा के बजाय प्यार और सम्मान हो, तो खूंखार से खूंखार जानवर भी इंसान का दोस्त बन सकता है। देश भर के बच्चे अब छत्तीसगढ़ की इस अनूठी मिसाल के बारे में अपनी किताबों में पढ़ेंगे।

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