मध्यप्रदेश

सी.एम. हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर कलेक्टर सख्त; लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई

सी.एम. हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर कलेक्टर सख्त; लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई

कटनी: जिले में चल रहे विशेष जनकल्याण अभियान के तहत अब सी.एम. हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित समाधान किया जाएगा। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने इस संबंध में बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सभी विभाग प्रमुखों सहित लेवल-1 (L-1) और लेवल-2 (L-2) के अधिकारियों को त्वरित और संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। सी.एम. हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर कलेक्टर सख्त; लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई

कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि 21 जून (अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस) तक चलने वाले इस विशेष अभियान में आमजन की समस्याओं का समाधान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 11 जून तक भेजने होंगे ‘स्पेशल क्लोज’ के प्रस्ताव

कलेक्टर श्री तिवारी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार:

  • सभी अधिकारी तत्काल सी.एम. हेल्पलाइन पोर्टल पर लंबित शिकायतों की समीक्षा करें और आवेदकों की संतुष्टि के साथ उनका निराकरण दर्ज करें।

  • जिन मामलों में स्थानीय स्तर पर कार्यवाही संभव नहीं है और शासन स्तर से निर्णय होना है, उनके लिए संबंधित विभाग के लेवल-3 (L-3) अधिकारी को 11 जून तक हर हाल में ‘फोर्स क्लोज’ या ‘स्पेशल क्लोज’ का प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा।

  • जिला प्रशासन ने बिना किसी ठोस और वैध कारण के शिकायतों को ‘स्पेशल क्लोज’ करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।सी.एम. हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर कलेक्टर सख्त; लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी सीधी कार्रवाई

 100 दिनों से लंबित मामलों पर नपेगा अमला

बैठकों में केवल समीक्षा की औपचारिकता नहीं चलेगी। निर्देशों में साफ कहा गया है कि यदि 100 दिनों से अधिक समय से लंबित चल रही शिकायतों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा, तो संबंधित लापरवाह अधिकारियों की कार्यप्रणाली की सीधी समीक्षा समय-सीमा (TL) की बैठक में की जाएगी और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

 शिविरों में बुलाई जाएगी जनता, सीधे फीडबैक लेंगे अधिकारी

“12 जून से 18 जून के बीच आयोजित होने वाले जनकल्याण शिविरों में शिकायतकर्ताओं से सीधा संपर्क किया जाएगा या उन्हें शिविरों में आमंत्रित किया जाएगा। वहां इस बात की ऑन-स्पॉट समीक्षा की जाएगी कि उनकी शिकायत का जो निराकरण अधिकारी ने दर्ज किया है, वह गुणवत्तापूर्ण है या नहीं। यदि निराकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जवाबदेही तय करते हुए कड़ी कार्यवाही की जाएगी।” — श्री आशीष तिवारी, कलेक्टर (कटनी)

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