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चीन की बढ़ेगी टेंशन: समंदर को मिलेगा नया ‘सिकंदर’, भारत-जर्मनी के बीच 99,000 करोड़ रुपये की सबमरीन डील तय

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नई दिल्ली / मुंबई: चीन की बढ़ेगी टेंशन: समंदर को मिलेगा नया ‘सिकंदर’, भारत-जर्मनी के बीच 99,000 करोड़ रुपये की सबमरीन डील तय!। भारतीय नौसेना को हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अजेय बनाने की दिशा में देश को एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा सौदों में से एक—‘प्रोजेक्ट-75I’ (Project-75I) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है।

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चीन की बढ़ेगी टेंशन: समंदर को मिलेगा नया ‘सिकंदर’, भारत-जर्मनी के बीच 99,000 करोड़ रुपये की सबमरीन डील तय!

सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने 6 अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन्स के स्वदेशी निर्माण के लिए जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ व्यावसायिक और लागत संबंधी बातचीत (Commercial Negotiations) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। रक्षा क्षेत्र का यह मेगा सौदा करीब 99,000 करोड़ रुपये (लगभग 10-11 बिलियन डॉलर) का है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच बातचीत के सभी प्रमुख दौर पूरे हो चुके हैं और जल्द ही इस ऐतिहासिक और रणनीतिक रक्षा सौदे पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।

क्यों खास हैं ये पनडुब्बियां? क्या है जर्मन AIP तकनीक?

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये सभी 6 पनडुब्बियां उन्नत ‘फ्यूल-सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (AIP) तकनीक से लैस होंगी।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को जबरदस्त बूस्ट

यह मेगा प्रोजेक्ट पूरी तरह से भारत सरकार के रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) मॉडल और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। सौदे की शर्तों के मुताबिक:

चूंकि MDL पहले भी स्कॉर्पीन क्लास (कलवरी क्लास) की पनडुब्बियों का सफल निर्माण कर चुकी है, ऐसे में इस नए प्रोजेक्ट से भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और देश में रोजगार के अवसरों को भारी बढ़ावा मिलेगा।

चीन की नौसैनिक चुनौतियों का करारा जवाब

हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की बढ़ती दखलअंदाजी और परमाणु व पारंपरिक पनडुब्बियों के बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए भारतीय नौसेना के लिए यह डील एक बड़ा ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाली है।

परमाणु पनडुब्बियों के मुकाबले ये डीजल-इलेक्ट्रिक AIP पनडुब्बियां बेहद कम लागत में लगभग परमाणु पनडुब्बी जैसा ही दम रखती हैं। अपनी बेहतरीन मारक क्षमता (भारी टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलें) और अदृश्य रहने की खूबी के कारण ये नई सबमरीन्स भारतीय नौसेना की पानी के नीचे युद्ध लड़ने की क्षमता (Subsurface Warfare Capability) को एक नई और अभेद्य ऊंचाई पर ले जाएंगी।

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