Monday, May 11, 2026
Latest:
Latestअंतराष्ट्रीय

समुद्र के नीचे चीन की बड़ी चाल: पनडुब्बी युद्ध में बढ़त के लिए ग्लोबल मैपिंग और सेंसर नेटवर्क पर जोर

समुद्र के नीचे चीन की बड़ी चाल: पनडुब्बी युद्ध में बढ़त के लिए ग्लोबल मैपिंग और सेंसर नेटवर्क पर जोर, चीन समुद्र के भीतर बड़े पैमाने पर मैपिंग और सेंसर नेटवर्क तैयार कर रहा है, जिसे भविष्य के पनडुब्बी युद्ध की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। यह अभियान अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ संभावित टकराव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

समुद्र के नीचे चीन की बड़ी चाल: पनडुब्बी युद्ध में बढ़त के लिए ग्लोबल मैपिंग और सेंसर नेटवर्क पर जोर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री सर्वे कर रहा है। इस मिशन में कई शोध जहाज और सैकड़ों समुद्री सेंसर शामिल हैं, जो समुद्र की गहराई, तापमान, लवणता और धाराओं जैसी अहम जानकारियां जुटा रहे हैं।

इस अभियान में डोंग फांग हॉन्ग 3 जैसे अत्याधुनिक रिसर्च जहाज की भी अहम भूमिका है, जिसे ओशियन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना संचालित करती है। यह जहाज ताइवान, गुआम और हिंद महासागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के पास कई बार सक्रिय रह चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्वे सिर्फ वैज्ञानिक शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा सैन्य उपयोग भी हो सकता है। समुद्र से जुड़ी ये जानकारियां पनडुब्बियों को छिपाने, उनकी मूवमेंट तय करने और दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने में बेहद मददगार होती हैं।

चीन ने खास तौर पर फिलीपींस, गुआम, हवाई और जापान के आसपास के क्षेत्रों पर फोकस किया है, जो सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वहीं हिंद महासागर में मलक्का स्ट्रेट जैसे व्यापारिक मार्गों के पास मैपिंग से चीन अपनी सप्लाई लाइनों की सुरक्षा मजबूत करना चाहता है।

यह पूरा अभियान चीन की “सिविल-मिलिट्री फ्यूजन” नीति के तहत चल रहा है, जिसमें वैज्ञानिक रिसर्च और सैन्य रणनीति को साथ जोड़कर काम किया जाता है। इसका उद्देश्य भविष्य में समुद्र को “पारदर्शी” बनाना है, यानी ऐसी स्थिति जहां हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

कुल मिलाकर, यह पहल दिखाती है कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ जमीन या हवा में ही नहीं, बल्कि समुद्र की गहराइयों में भी निर्णायक रूप से लड़ा जाएगा।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम