NEET पेपर लीक में CBI का सबसे बड़ा खुलासा: परीक्षा से 10 दिन पहले ही कोचिंग माफिया शिवराज के पास था असली पेपर; ‘मॉक टेस्ट’ के बहाने बच्चों को रटवाए सवाल-जवाब। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘NEET’ पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तफ्तीश में एक ऐसा खौफनाक और चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसने पूरे देश के शिक्षा जगत को हिलाकर रख दिया है। सीबीआई जांच के मुताबिक, लातूर के मशहूर रेणुकाई करियर सेंटर (RCC) कोचिंग के फाउंडर और प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर को परीक्षा से पूरे 10 दिन पहले (23 अप्रैल को ही) नीट का असली प्रश्नपत्र मिल चुका था।
शिवराज ने इस लीक पेपर को सीधे बच्चों को देने के बजाय शातिराना अंदाज में अपनी कोचिंग के ‘मॉक टेस्ट’ (Mock Test) में तब्दील कर दिया और छात्रों को वही असली सवाल-जवाब हूबहू रटवा डाले।
पेपर सेटर कुलकर्णी ने लीक किया था केमेस्ट्री का पेपर
सीबीआई के हत्थे चढ़े शिवराज मोटेगांवकर को यह पेपर लातूर के ही एक अन्य प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी और मनीषा मांढरे के जरिए मिला था। चौंकाने वाली बात यह है कि पी.वी. कुलकर्णी खुद NEET का एग्जाम पेपर बनाने वाले आधिकारिक पैनल (Syllabus/Paper Setting Panel) में शामिल थे। जब कुलकर्णी ने देश भर के छात्रों के लिए केमेस्ट्री का पेपर तैयार किया, तो उन्होंने इसकी पूरी कॉपी और उत्तरों का एक्सेस शिवराज मोटेगांवकर से साझा कर दिया। इसके बदले शिवराज द्वारा कुलकर्णी को एक बहुत बड़ी रकम दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
टीचर्स को भी नहीं थी भनक, रातभर में तैयार हुआ ‘मॉक पेपर’
जांच में खुलासा हुआ कि 23 अप्रैल की शाम को जैसे ही केमेस्ट्री और बायोलॉजी का असली पेपर शिवराज के हाथ लगा, उसने अपने कोर ग्रुप के केमेस्ट्री टीचर्स को भी इसकी भनक नहीं लगने दी। उसने पूरी रात जागकर अपनी टीम से इसे आरसीसी कोचिंग के ‘मॉक टेस्ट पेपर’ के रूप में सेट करवाया। इसके बाद 25 अप्रैल को बच्चों का पहला मॉक टेस्ट लिया गया।
शिवराज ने लातूर के अलावा नांदेड़, संभाजी नगर, पुणे (हड़पसर) और अकोला सहित अपनी सभी 11 ब्रांचों के सेंटर्स पर यह मॉक पेपर भिजवाया और कड़े निर्देश दिए कि बच्चों को फाइनल एग्जाम के लिए बस यही सवाल और उनके जवाब रटाए जाएं।
अमीर छात्रों को 100% असली सवाल, गरीब बच्चों के साथ धोखा!
कोचिंग माफिया शिवराज मोटेगांवकर के इस खेल में भी एक घिनौना भेदभाव सामने आया है:
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ज्यादा फीस देने वाले छात्र: जिन अमीर छात्रों ने भारी-भरकम और एक्स्ट्रा फीस देकर आखिरी के तीन ‘मॉक टेस्ट’ अटेंड किए, उन्हें 100% असली लीक पेपर के सवाल-जवाब रटवाए गए। उनसे कहा गया कि “यह मोटेगांवकर सर के सालों के रिसर्च का जादुई पेपर है, इसे पढ़ लिया तो रैंक पक्की है।”
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रेगुलर और सामान्य छात्र: जो गरीब या सामान्य छात्र मोटी फीस नहीं दे पा रहे थे, उनके मॉक पेपर में असली पेपर के केवल 30 से 40 प्रतिशत सवाल ही मिक्स किए गए, ताकि किसी को शक न हो और कोचिंग का ओवरऑल पासिंग परसेंटेज भी न गिरे।
9 दिन की सीबीआई रिमांड पर प्रोफेसर शिवराज, मोबाइल से मिला असली पेपर
दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत के जज अजय गुप्ता ने सोमवार को शिवराज मोटेगांवकर को 9 दिन की सीबीआई कस्टडी (हिरासत) में भेज दिया है। रविवार को लातूर से हुई गिरफ्तारी के बाद जब सीबीआई ने शिवराज के पर्सनल मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की, तो उसमें 3 मई को होने वाली परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र पहले से ही मौजूद मिला। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि मोटेगांवकर एक अंतरराज्यीय संगठित पेपर लीक गिरोह का बेहद सक्रिय और मुख्य मोहरा है, जिससे पूछताछ में देशव्यापी नेटवर्क का खुलासा होना बाकी है।

