श्री हनुमान जयंती नहीं, जन्मोत्सव या ‘प्राकट्य उत्सव’ के रूप में मनाने का किया आह्वान
श्री हनुमान जयंती नहीं, जन्मोत्सव या ‘प्राकट्य उत्सव’ के रूप में मनाने का किया आह्वा
कटनी। श्री बजरंग बाल रामायण समाज सेवा समिति कटनी द्वारा गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को मनाए जाने वाले श्री हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों से विशेष आग्रह किया गया है हनुमान जयंती के बजाय श्री हनुमान जन्मोत्सव अथवा प्राकट्य उत्सव के रूप में संबोधित किया जाए।
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड में भगवान श्रीराम द्वारा हनुमानजी को “अजर-अमर एवं गुणों की निधि” होने का आशीर्वाद प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्री हनुमानजी चारों युगों में विद्यमान हैं और आज भी भक्तों के बीच सक्रिय रूप से विराजमान हैं, इसलिए उनका उत्सव जन्मोत्सव अथवा प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाना अधिक उपयुक्त माना गया है।
समिति ने कहा कि जयंती सामान्यतः उन महापुरुषों की मनाई जाती है जिनका जन्म और देहावसान दोनों हुए हों, जबकि श्री हनुमानजी को चिरंजीवी माना गया है। वे सेवा, भक्ति, सत्संग और सकारात्मक चिंतन के प्रतीक हैं तथा कलयुग में भक्तों के रक्षक माने जाते हैं।
श्चैत शुक्ल पूर्णिमा, गुरुवार 2 अप्रैल को उत्साहपूर्वक श्री हनुमान जन्मोत्सव मनाने, शुभकामनाएं साझा करने एवं धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता करे