बुंदेलखंड-बघेलखंड बनेगा नया पंजाब-हरियाणा! सीएम मोहन यादव की किसानों से बड़ी अपील- “कीमत जो भी मिले, ज़मीन मत बेचना
बुंदेलखंड-बघेलखंड बनेगा नया पंजाब-हरियाणा! सीएम मोहन यादव की किसानों से बड़ी अपील- "कीमत जो भी मिले, ज़मीन मत बेचना

बुंदेलखंड-बघेलखंड बनेगा नया पंजाब-हरियाणा! सीएम मोहन यादव की किसानों से बड़ी अपील- “कीमत जो भी मिले, ज़मीन मत बेचना
कटनी : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण करने के बाद एक प्रेस वार्ता में विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए इसे एक क्रांतिकारी सौगात बताया है. सीएम ने कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन पानी की कमी एक बड़ी चुनौती थी. अब यह ऐतिहासिक स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए अमृतधारा साबित होगी.
परियोजना की 5 सबसे बड़ी खास बातें (Key Highlights)
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कुल लागत: 1600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि से इस परियोजना का निर्माण हुआ है, जिसमें केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ रुपये का योगदान दिया है.
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सिंचाई और पेयजल: इस ऐतिहासिक परियोजना से पांचों जिलों के कुल ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा और पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा.
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बिजली का उत्पादन: टनल के माध्यम से पानी की उपलब्धता के साथ-साथ कई स्थानों पर बिजली भी बनाई जाएगी.
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100 साल तक सुरक्षित: लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह टनल इतनी मजबूत है कि भीषण भूकंप आने पर भी 100 साल तक पूरी तरह सुरक्षित रहेगी.
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इंजीनियरिंग की केस स्टडी: टनल की गहराई कई स्थानों पर जमीन से नीचे 120 फीट तक है, जो भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक केस स्टडी बनेगी.
“किसान अपनी ज़मीन न बेचें, रुक जाएगा पलायन” – सीएम की अपील
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों और व्यापारियों के लिए इसे एक बड़ा वरदान बताते हुए विशेष अपील की:
“किसान भाई किसी भी कीमत पर अपनी जमीन न बेचें। पानी आने के बाद यह क्षेत्र भविष्य में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ देगा। इससे क्षेत्र से होने वाला पलायन पूरी तरह रुकेगा और आर्थिक समृद्धि आएगी।”
सीएम ने बताया कि सोन कछार के 152 क्यूबिक डिस्चार्ज से जिलों को मिलने वाली सिंचाई इस प्रकार है:
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सतना जिला: 1 लाख 4 हजार 970 हेक्टेयर
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मैहर जिला: 54 हजार 227 हेक्टेयर
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कटनी जिला: 21 हजार 823 हेक्टेयर
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रीवा जिला: 3 हजार 532 हेक्टेयर
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पन्ना जिला: 448 हेक्टेयर (कुल 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया में सिंचाई की सीधी सुविधा मिलेगी)
विज्ञान का चमत्कार: ऊपर बहेगी कटनी नदी, नीचे से मां नर्मदा

मुख्यमंत्री ने इस टनल को विज्ञान का एक अद्भुत चमत्कार बताया:
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अनोखा संगम: टनल परियोजना में एक ओर जहां नीचे टनल के माध्यम से नर्मदा नदी बहेगी, वहीं दूसरी ओर इसके ठीक ऊपर से कटनी नदी प्रवाहित होगी.
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गंगा बेसिन में हरियाली: खंभात की खाड़ी में मिलने वाली मां नर्मदा अब इस टनल के माध्यम से गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के अंचल को भी हरा-भरा करेंगी.
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जल्द मिलेगा पानी: आगामी तीन महीनों में ही रबी की फसल के लिए किसानों को 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवा दिया जाएगा.
जर्मन तकनीक और 11 साल का लंबा संघर्ष

इस टनल को बनाने का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है:
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2015-16 से आई गति: वर्ष 2015 तक केवल 1406 मीटर टनल की बोरिंग हो सकी थी. इसके बाद साल 2016 से जर्मनी से मंगवाई गई आधुनिक मशीन से इसकी खुदाई शुरू की गई.
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2026 में मिली पूर्ण सफलता: 8-8 घंटे की तीन शिफ्टों में इंजीनियरों, टेक्नीशियनों और मजदूरों ने सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर कठिन चट्टानों के बीच संघर्ष किया और आखिरकार वर्ष 2026 में इस भगीरथ प्रयास को पूर्ण सफलता मिली है.
इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा, सांसद गणेश सिंह सहित कई विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे.









