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Breaking: 24 बच्चों को बंधक बनाने वाला सिरफिरा देर रात मुठभेड़ में ढेर, सुरक्षित निकाले गए बच्चे

फरुखाबाद। मौसा की हत्या के आरोप में निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पाए एक व्यक्ति ने पुलिस और गांववालों को मजा चखाने के लिए गांव के ही 24 बच्चों को घर में बंधक बना लिया। उसने अपनी सालभर की बेटी के जन्मदिन पार्टी के बहाने बच्‍चों को बुलाया था। पुलिस जब इन्हें छुड़ाने पहुंची तो बम फेंक दिया। इसमें कोतवाल समेत तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। फिर समझाने पहुंचे दोस्त को भी गोली मार दी।

farrukhabad hostage photo by hindustan 31 jan 2020 1580414859

देर रात सिरफिरे ने आदेश बाथम की 6 महीने की बेटी शबनम को छत के मोखले से पुलिस को सौंप दिया। बच्ची को पुलिस एक घर में ले गई है। इसके बाद उसने डीएम के नाम एक टाइप किया हुआ पत्र बाहर फेंका, जिसमें लिखा है कि प्रधान ने उसे कालोनी नहीं दी और न ही शौचालय बनवाया।  वहीं देर रात आइजी मोहित अग्रवाल भी गांव पहुंच गए और अफसरों से पूरी जानकारी ली। इसके बाद ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने सुभाष के घर का दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाल लिया। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद वह छुड़ाकर अंदर भागा तो पीछे से पुलिस भी घुस गई। इस पर वह फिर फायरिंग करने लगा, जवाबी फायरिंग में पुलिस की गोली लगने से सुभाष की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने घर में बने बेसमेंट से बच्चों को सकुशल निकाल लिया।

यह सनसनीखेज वारदात जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के बरेली-इटावा हाईवे स्थित गांव करथिया में हुई। यहां का 40 वर्षीय सुभाष बाथम अपने मौसा मेघनाथ की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा पा चुका है। घर में चोरी की शिकायत पर उसने 2001 में मौसा की हत्या की थी। 2005 में उसे उम्रकैद हुई। 10 साल जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गई। करीब तीन महीने पहले एसओजी ने फतेहगढ़ में हुई चोरी के आरोप में उसे जेल भेज दिया। वहां से डेढ़ माह पूर्व जमानत पर छूटा। खुद को फंसाने के शक में उसने पुलिस व ग्रामीणों से बदला लेने की योजना बना डाली।

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