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रक्त और पानी एक साथ नहीं बहेंगे भारत ने सिंधु जल संधि को किया समाप्त; जानें पाकिस्तान में क्यों मचा हड़कंप?

रक्त और पानी एक साथ नहीं बहेंगे भारत ने सिंधु जल संधि को किया समाप्त; जानें पाकिस्तान में क्यों मचा हड़कंप?

रक्त और पानी एक साथ नहीं बहेंगे भारत ने सिंधु जल संधि को किया समाप्त; जानें पाकिस्तान में क्यों मचा हड़कंप?

नेशनल डेस्क, नई दिल्ली: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर सीमा पार से बढ़ते शोर-शराबे के बीच भारत ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, 1960 की सिंधु जल संधि अपने मौजूदा स्वरूप में अब दोबारा लागू नहीं होगी और यह प्रभावी रूप से समाप्त हो चुकी है

सरकारी सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि 1950 के दशक की परिस्थितियों और पुरानी तकनीक पर आधारित यह संधि आज के समय के अनुकूल नहीं है। यह संधि आपसी सद्भावना के लिए बनी थी, न कि सीमा पार से फैलाए जा रहे आतंकवाद को सहने के लिए।

“50% पानी अरब सागर में व्यर्थ”: पाकिस्तान के जल प्रबंधन की खुली पोल

सरकारी सूत्रों ने पाकिस्तान के जल प्रबंधन और उसकी मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं: रक्त और पानी एक साथ नहीं बहेंगे भारत ने सिंधु जल संधि को किया समाप्त; जानें पाकिस्तान में क्यों मचा हड़कंप?

 पहलगाम हमले के बाद भारत का कड़ा फैसला

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इस संधि को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था।

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि “आतंकवाद और द्विपक्षीय संधियों का लाभ एक साथ नहीं चल सकता”

 भारत द्वारा उठाए गए 4 बड़े कदम:

  1. डेटा शेयरिंग बंद: नदियों के पानी से जुड़ा डेटा साझा करना पूरी तरह रोक दिया गया है।

  2. बैठकें व निरीक्षण रद्द: सालाना बैठकें, परियोजनाओं का आपसी निरीक्षण और अंतरराष्ट्रीय अदालती कार्यवाहियों में हिस्सा लेना बंद किया गया।

  3. नई परियोजनाओं में तेजी: जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जैसी जल-विद्युत परियोजनाओं के काम में भारी तेजी लाई गई है।

  4. नए सर्वे शुरू: भारत अब नई जल परियोजनाओं के निर्माण के लिए तेजी से विभिन्न स्थानों पर सर्वेक्षण कर रहा है।

 पाकिस्तान में भुखमरी और सूखे का खौफ

भारत के इस साहसिक और कड़े फैसले से पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है।

  • 80% निर्भरता पर खतरा: पाकिस्तान की लगभग 80% खेती और पेयजल आपूर्ति इन्हीं पश्चिमी नदियों पर निर्भर है।

  • आर्थिक तबाही का डर: पहले से ही आर्थिक कंगाली, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता झेल रहे पाकिस्तान को डर है कि भारत द्वारा पानी का बहाव नियंत्रित करने से वहां भुखमरी और सूखे की स्थिति बन जाएगी।

  • अंतरराष्ट्रीय पैंतरा फेल: पाकिस्तान द्वारा भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने की हर कोशिश नाकाम हो चुकी है।

 भारत का अंतिम संदेश

भारत ने वैश्विक मंच पर साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से पनप रहे आतंकवाद पर ठोस, विश्वसनीय और स्थायी रोक नहीं लगाता, तब तक इस संधि की बहाली का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

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