भिंड: लहचूरा पंचायत में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र घोटाला; सचिव निलंबित, FIR के निर्देश
गोहद/भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोहद जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत लहचूरा में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा और अनियमितता का मामला सामने आया है। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और संदिग्ध गतिविधि पर जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) वीरसिंह चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला पंचायत सीईओ ने तत्परता दिखाते हुए पंचायत सचिव माताप्रसाद बघेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही जनपद पंचायत गोहद के सीईओ को मालनपुर थाने में आरोपी सचिव के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा, आईडी-पासवर्ड का हुआ दुरुपयोग
यह पूरा घोटाला कलेक्टर कार्यालय के जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा की गई एक विस्तृत जांच में उजागर हुआ। जांच रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत सचिव की आधिकारिक आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करके थोक के भाव कई जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि बाद में इन प्रमाण पत्रों को बिना किसी उचित और वैधानिक कारण के सिस्टम से निरस्त (कैंसिल) भी कर दिया गया, जो सीधे तौर पर एक बड़े रैकेट या फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
जांच रिपोर्ट में सामने आए ये संदिग्ध मामले
विभाग की जांच में कई ऐसे प्रमाण पत्र मिले हैं जो पूरी तरह संदिग्ध हैं और जिनमें नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं:
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दो बार पंजीकरण: रमेश जाटव नामक व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र 6 जून 2024 और 7 जून 2024 को लगातार दो बार पंजीकृत किया गया।
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जारी कर किया निरस्त: रामजीलाल का मृत्यु प्रमाण पत्र 7 जून 2024 को जारी किया गया और फिर 23 दिसंबर 2024 को उसे बिना कारण निरस्त कर दिया गया।
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लोकमन का मामला: लोकमन नाम के व्यक्ति का प्रमाण पत्र 6 मार्च 2023 को जारी हुआ था, जिसे करीब दो साल बाद 22 जनवरी 2025 को कैंसिल कर दिया गया।
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जन्म प्रमाण पत्र में खेल: मुन्नी देवी माहौर का जन्म प्रमाण पत्र 22 जुलाई 2023 को जारी हुआ और उसे 1 फरवरी 2025 को निरस्त कर दिया गया।
पुलिस जांच में खुलेंगे कई राज!
जिला पंचायत सीईओ वीरसिंह चौहान के आदेश के बाद अब मालनपुर थाना पुलिस इस मामले में धोखाधड़ी और शासकीय दस्तावेजों के दुरुपयोग की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने जा रही है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि सचिव की आईडी से हुए इस खेल के पीछे कुछ बाहरी तत्व या ऑनलाइन कियोस्क संचालक भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस एफआईआर और आगामी विवेचना के बाद इस घोटाले से जुड़े कई अन्य चेहरों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

