Birth and Death Registration Amendment Bill 2026: संसद से पास हुआ नया कानून-जानिए जन्म-मृत्यु पंजीकरण में क्या-क्या बदल जाएगा
Birth and Death Registration Bill 2026 Passed: संसद से पास हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण बिल, जानिए आम जनता पर क्या पड़ेगा असर

Birth and Death Registration Amendment Bill 2026: संसद से पास हुआ नया कानून-जानिए जन्म-मृत्यु पंजीकरण में क्या-क्या बदल जाएगा
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और सख्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. संसद के उच्च सदन राज्यसभा ने मंगलवार को ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026’ को ध्वनि मत (Voice Vote) से पारित कर दिया. इससे पहले यह अहम विधेयक लोकसभा से भी पारित हो चुका था, जिसके बाद अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.
यह नया कानून दशकों पुराने ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969’ (Registration of Births and Deaths Act, 1969) की जगह लेगा. इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य डेटा में होने वाली गड़बड़ियों व फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से अंकुश लगाना और डिजिटल व समयबद्ध रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना है.
नए कानून की 5 सबसे मुख्य बातें और बदलाव:
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डिजिटल और केंद्रीकृत डेटाबेस (Centralized Digital Database):
नए कानून के तहत देशभर के सभी जन्म और मृत्यु का एक राष्ट्रीय (National) और राज्य-स्तरीय डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा. इससे डेटा आपस में सिंक रहेगा और फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वालों पर लगाम लगेगी.
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आधार और पहचान पत्रों से सीधा लिंकेज:
जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को सीधे आधार, मतदाता सूची (Voter ID), राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों से जोड़ा जाएगा. किसी व्यक्ति की मृत्यु के दर्ज होते ही संबंधित सेवाओं से उसका नाम स्वतः अपडेट हो सकेगा.
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समय पर रिपोर्टिंग अनिवार्य:
जन्म या मृत्यु की सूचना तय समयसीमा के भीतर देना अब और अधिक अनिवार्य कर दिया गया है. देरी से रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया और नियमों को अधिक सख्त बनाया गया है ताकि वास्तविक समय का डेटा (Real-time Data) उपलब्ध रहे.
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अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की जिम्मेदारी:
अस्पतालों, नर्सिंग होम और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए जन्म व मृत्यु का तुरंत डिजिटल इंद्राज करना अनिवार्य होगा, जिससे आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी.
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पारदर्शिता से रुकेगा फर्जीवाड़ा:
दस्तावेजों में हेरफेर करके बनाए जाने वाले फर्जी बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट्स पर इस केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम से पूरी तरह रोक लगेगी.
क्यों पड़ी इस नए बिल की जरूरत?
संसद में विधेयक पेश करते हुए सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि 1969 के कानून में कई व्यावहारिक खामियां थीं और बदलती डिजिटल दुनिया में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बेहद जरूरी था. नया बिल पास होने से केंद्र और राज्य सरकारों को जनकल्याणकारी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सटीक आबादी के आंकड़े तैयार करने में मदद मिलेगी.








