उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का बड़ा बयान: विद्यार्थी हित, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर आधारित कार्य संस्कृति विकसित करें विश्वविद्यालय
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का बड़ा बयान: विद्यार्थी हित, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर आधारित कार्य संस्कृति विकसित करें विश्वविद्यालय
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का बड़ा बयान: विद्यार्थी हित, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर आधारित कार्य संस्कृति विकसित करें विश्वविद्यालय
कटनी/भोपाल: मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित “शिक्षा संवाद” कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के सख्त निर्देश दिए।
मंत्री श्री परमार ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि ये समाज की समस्याओं का समाधान करने वाले संवेदनशील और राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों के निर्माण केंद्र हैं।
समाचार के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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सार्थक ऐप से दर्ज होगी छात्रों की हाजिरी: प्राध्यापकों के बाद अब वर्तमान शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति भी ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इससे कक्षाओं में अनुशासन, नियमितता और शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
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समय पर ‘प्रवेश, परीक्षा और परिणाम’: मंत्री जी ने साफ कहा कि समय पर प्रवेश, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की आधारशिला हैं। परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन और ऑनलाइन परीक्षा प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए।
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अनुसंधान का समाज से जुड़ाव: विश्वविद्यालयों में शोध केवल कागजी या अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अनुसंधान ऐसा हो जो समाज, उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य और स्थानीय समस्याओं का व्यावहारिक समाधान दे सके।
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NEP-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास, स्टार्टअप और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना विश्वविद्यालयों की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
“विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि, कोई समझौता नहीं”
“विश्वविद्यालयों की कार्य संस्कृति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक निर्णय विद्यार्थी हित, गुणवत्ता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया जाए। छात्रों के शैक्षणिक हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।” — श्री इंदर सिंह परमार, उच्च शिक्षा मंत्री
आदर्श विश्वविद्यालय का खाका और बुनियादी सुविधाएं
मंत्री श्री परमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि परिसर में स्वच्छ, सुरक्षित, अनुशासित और छात्र-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही निम्नलिखित सुविधाओं को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया: उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का बड़ा बयान: विद्यार्थी हित, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर आधारित कार्य संस्कृति विकसित करें विश्वविद्यालय
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आधुनिक पुस्तकालय और उन्नत प्रयोगशालाएँ।
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बेहतर खेल सुविधाएं और डिजिटल संसाधन।
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मजबूत शोध अवसंरचना (Research Infrastructure)।
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एक्टिव प्लेसमेंट सेल और कौशल विकास कार्यक्रम।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, सुशासन और विद्यार्थी-केंद्रित व्यवस्था के एक आदर्श मॉडल (Center of Excellence) के रूप में विकसित करना है, ताकि यहाँ से निकलने वाले युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सकें।








