ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में परिवार को बड़ा झटका; कोर्ट ने खारिज की दोबारा पोस्टमार्टम की मांग, पर दिया यह बड़ा निर्देश। राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में पीड़ित परिवार की कानूनी लड़ाई को बुधवार को बड़ा झटका लगा। भोपाल की जिला अदालत ने मृतका के शव का दोबारा (Re-Postmortem) पोस्टमार्टम कराने की परिजनों की याचिका को खारिज कर दिया है।
ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में परिवार को बड़ा झटका; कोर्ट ने खारिज की दोबारा पोस्टमार्टम की मांग, पर दिया यह बड़ा निर्देश
हालांकि, अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस को एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी निर्देश दिया है, जिससे भविष्य में वैज्ञानिक जांच की उम्मीदें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर परिजनों ने उठाए थे सवाल
बता दें कि ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद से ही उनका परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। परिजनों ने पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए दावा किया था कि मौत के वास्तविक कारणों को छुपाया जा रहा है। मामले की निष्पक्षता और सच्चाई को सामने लाने के लिए परिवार ने अदालत से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की गुहार लगाई थी, जिसे बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने नामंजूर कर दिया।
‘दिल्ली AIIMS में हो पोस्टमार्टम…’ कोर्ट ने कहा- यह हमारे क्षेत्राधिकार से बाहर
पीड़ित परिवार की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर पांडे ने बताया कि उन्होंने निष्पक्षता के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी।
कोर्ट की टिप्पणी: अदालत ने इस मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम का आदेश देना भोपाल जिला अदालत के न्यायिक क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) से बाहर है। अधिवक्ता के अनुसार, परिवार को उम्मीद थी कि किसी स्वतंत्र केंद्रीय विशेषज्ञ संस्थान से जांच होने पर मौत का असली सच सामने आ सकेगा।
-80°C (माइंस 80 डिग्री) तापमान पर शव सुरक्षित रखने के आदेश
भले ही अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम की इजाजत नहीं दी, लेकिन साक्ष्यों को नष्ट होने से बचाने के लिए एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है।
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पुलिस को कड़ा निर्देश: कोर्ट ने भोपाल पुलिस को निर्देश दिया है कि मध्य प्रदेश में ऐसे अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज या मेडिकल सुविधा वाले स्थान की तत्काल जानकारी खोजी जाए, जहां ट्विशा के पार्थिव शरीर को माइनस 80 डिग्री (-80°C) तापमान पर सुरक्षित रखा जा सके।
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भविष्य की जांच के रास्ते खुले: अदालत ने पुलिस से इस संबंध में जल्द से जल्द रिपोर्ट तलब की है। शव को इतने कम तापमान पर फ्रीज करने का मकसद यह है कि भविष्य में यदि उच्च न्यायालय के आदेश या किसी वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच (जैसे डीएनए या टॉक्सिकोलॉजी) की जरूरत पड़े, तो मृतका के टिश्यूज और साक्ष्य पूरी तरह सुरक्षित मिल सकें।
ट्विशा शर्मा की मौत का यह रहस्यमयी मामला लगातार मध्य प्रदेश की सुर्खियों में बना हुआ है। अदालत के इस फैसले के बाद अब पीड़ित परिवार न्याय के लिए उच्च न्यायालय (High Court) का रुख करने का विचार कर रहा है।

