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क्रिप्टो के नाम पर बड़ी डिजिटल डकैती: व्यापारी के बेटे से 50 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी; बंपर मुनाफे का झांसा देकर शातिर ठगों ने साफ किए ₹49.47 लाख

जबलपुर में साइबर क्राइम का नया खेल: अवैध ऑनलाइन कंटेंट बेचकर कमा रहा था लाखों, पुलिस ने किया भंडाफोड़

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क्रिप्टो के नाम पर बड़ी डिजिटल डकैती: व्यापारी के बेटे से 50 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी; बंपर मुनाफे का झांसा देकर शातिर ठगों ने साफ किए ₹49.47 लाख।  शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक प्रतिष्ठित व्यापारी के बेटे के साथ करीब 50 लाख रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। शातिर साइबर अपराधियों ने युवक को एक फर्जी क्रिप्टो करेंसी कंपनी के जाल में फंसाकर बेहद सस्ते दामों पर शेयर खरीदने और रातों-रात बंपर मुनाफा कमाने का लालच दिया था। इस झांसे में आकर युवक महज 5 दिनों के भीतर ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर करता चला गया।

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पीड़ित परिवार की शिकायत और प्राथमिक जांच के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी (Fraud) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मोबाइल मैसेज से शुरू हुआ खेल, पिता ने दर्ज कराई FIR

कोतवाली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मठकरी कॉलोनी निवासी प्रतिष्ठित व्यापारी श्याम अग्रवाल (पुत्र चोखरमल अग्रवाल, उम्र 53 वर्ष) ने कोतवाली थाने पहुंचकर इस बड़े फर्जीवाड़े की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई है।

उन्होंने पुलिस को बताया कि पिछले साल 26 जून 2025 को उनके बेटे आयुष अग्रवाल के मोबाइल पर एक तथाकथित क्रिप्टो करेंसी कंपनी की तरफ से एक लिंक और मैसेज आया था। इस मैसेज में दावा किया गया था कि अगर वे उनकी कंपनी के माध्यम से डिजिटल करेंसी और शेयर में निवेश करते हैं, तो उन्हें बाजार से बहुत कम दामों पर शेयर मिलेंगे और कुछ ही दिनों में उनका पैसा कई गुना बढ़ जाएगा। अधिक मुनाफे के चक्कर में आयुष ठगों के इस डिजिटल चक्रव्यूह में फंस गया।

महज 5 दिनों के भीतर दर्जनों खातों में ट्रांसफर करवाए रुपये

ठगों का नेटवर्क कितना शातिर और संगठित था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने आयुष को सोचने तक का मौका नहीं दिया। 26 जून से 1 जुलाई 2025 के बीच, महज 5 दिनों के भीतर ठगों ने आयुष से एचडीएफसी (HDFC), एक्सिस (Axis) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के दर्जनों अलग-अलग बैंक खातों में कुल 49 लाख 47 हजार 264 रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

पकड़े जाने के डर से साइबर अपराधी हर बार एक नया बैंक खाता नंबर देते थे। उन्होंने आयुष से किश्तों में कभी 50 हजार, कभी तीन लाख तो कभी एक साथ 12 लाख रुपये जैसी भारी-भरकम रकमें अपने फर्जी खातों में डलवाईं।

पैसे रिफंड मांगते ही खुली पोल, कंपनी ने तोड़ा संपर्क

इस पूरे सुनियोजित फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ 1 जुलाई 2025 को हुआ, जब लगातार मोटी रकम निवेश करने के बाद आयुष को कंपनी की कार्यप्रणाली पर गहरा शक हुआ। अपने पैसे सुरक्षित करने के लिए आयुष ने कंपनी के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर ‘विड्रॉल’ (पैसे वापस निकालने) का प्रयास किया, लेकिन पोर्टल से एक भी रुपया बाहर नहीं निकला।

इसके विपरीत, ठगों ने आयुष के मोबाइल पर एक नया मैसेज भेजकर कहा कि यदि वे अपने फंसे हुए पैसे निकालना चाहते हैं, तो उन्हें 50 हजार रुपये और जमा करने होंगे। इस पर आयुष का शक यकीन में बदल गया और उसने और पैसे डालने से साफ मना करते हुए अपनी पूरी रकम तुरंत वापस मांगी। इसके तुरंत बाद ठगों ने वेबसाइट से अपना संपर्क पूरी तरह काट लिया और आयुष का नंबर ब्लॉक कर दिया। खुद को ठगा महसूस करने पर आयुष ने अपने पिता को पूरी बात बताई, जिसके बाद अब पुलिस साइबर सेल की मदद से इन बैंक खातों और आईपीएल एड्रेस (IP Address) को ट्रैक करने में जुट गई है।

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