हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा नियुक्ति संवेदना का विषय हो सकती है, लेकिन सेवा नियमों का विकल्प नहीं; कंप्यूटर साइंस में BE की डिग्री होने पर भी नौकरी से निकाला
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा नियुक्ति संवेदना का विषय हो सकती है, लेकिन सेवा नियमों का विकल्प नहीं; कंप्यूटर साइंस में BE की डिग्री होने पर भी नौकरी से निकाला

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा नियुक्ति संवेदना का विषय हो सकती है, लेकिन सेवा नियमों का विकल्प नहीं; कंप्यूटर साइंस में BE की डिग्री होने पर भी नौकरी से निकाला
जबलपुर: सरकारी नौकरियों में अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी नौकरी में सहानुभूति सिर्फ अवसर दे सकती है, लेकिन नियमों से छूट नहीं।
प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति संवेदना का विषय हो सकती है, लेकिन यह सेवा नियमों का विकल्प नहीं बन सकती। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अनुकंपा पर नियुक्त एक सहायक ग्रेड-थ्री (Assistant Grade-3) कर्मचारी की रिट अपील को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
BE (कंप्यूटर साइंस) की डिग्री भी नहीं आई काम
यह पूरा मामला योग्यता से जुड़ी अनिवार्य शर्त को समय पर पूरा न करने का है।
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क्या था मामला: याचिकाकर्ता अमित सिंह बघेल की नियुक्ति सहायक ग्रेड-थ्री के पद पर अनुकंपा के आधार पर हुई थी। उनके नियुक्ति आदेश में एक निश्चित समयसीमा के भीतर सीपीसीटी (CPCT – Computer Proficiency Certification Test) परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्य शर्त रखी गई थी।
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कर्मचारी का तर्क: कर्मचारी के पास कंप्यूटर साइंस में बीई (BE in Computer Science) की उच्च शैक्षणिक डिग्री थी। इसी आधार पर कर्मचारी ने सीपीसीटी परीक्षा पास करने से छूट की मांग की थी और समयसीमा में इसे पास नहीं किया, जिसके बाद विभाग ने उनकी सेवा समाप्त कर दी थी।हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा नियुक्ति संवेदना का विषय हो सकती है, लेकिन सेवा नियमों का विकल्प नहीं; कंप्यूटर साइंस में BE की डिग्री होने पर भी नौकरी से निकाला
कोर्ट की दो टूक: नियम सबके लिए बराबर
युगलपीठ ने कर्मचारी की सेवा समाप्ति को पूरी तरह वैध और सही ठहराते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
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डिग्री से छूट नहीं: कोर्ट ने साफ कहा कि कंप्यूटर साइंस में बीई की बड़ी डिग्री होना भी किसी कर्मचारी को नियुक्ति आदेश में तय की गई अनिवार्य शर्तों और नियमों से मुक्त नहीं कर सकता।
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कर्मचारी का दायित्व: कोर्ट ने दोहराया कि नियुक्ति आदेश में जो भी अनिवार्य योग्यता और समयसीमा तय की जाती है, उसे तय वक्त के भीतर हासिल करना प्रत्येक सरकारी कर्मचारी का बुनियादी दायित्व है।
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योग्यता सर्वोपरि: सरकारी सेवाओं में योग्यता संबंधी शर्तों को सबसे ऊपर मानते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों में ढील देकर प्रशासनिक व्यवस्था की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।
फैसले का असर: हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब यह साफ हो गया है कि चाहे अनुकंपा नियुक्ति हो या सामान्य, यदि नियुक्ति पत्र में किसी टेस्ट (जैसे सीपीसीटी) को पास करने की शर्त और समयसीमा दी गई है, तो उच्च शैक्षणिक योग्यता होने के बावजूद उस नियम का पालन करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई को कानूनन सही माना जाएगा।








