Saturday, May 23, 2026
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विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ कोर्ट केस में बड़ी साजिश- शिकायतकर्ता वकील के दफ्तर से सबूतों वाला मोबाइल चोरी, पुलिस की भूमिका पर सवाल

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ कोर्ट केस में बड़ी साजिश- शिकायतकर्ता वकील के दफ्तर से सबूतों वाला मोबाइल चोरी, पुलिस की भूमिका पर सवाल

ग्वालियर/भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ कोर्ट में विचाराधीन कोविड-19 नियम उल्लंघन मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और रहस्यमयी मोड़ आया है। इस केस की पैरवी कर रहे शिकायतकर्ता वकील के दफ्तर में एक ऐसी अजीबोगरीब चोरी की वारदात हुई है, जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। शातिर चोर ने ऑफिस में रखे कीमती सामानों को छुआ तक नहीं, बल्कि वह सीधे उस खास मोबाइल फोन को उड़ा ले गया, जिसमें नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ सबसे अहम डिजिटल साक्ष्य मौजूद थे। यह पूरी घटना शिकायतकर्ता अधिवक्ता आशीष प्रताप सिंह के कार्यालय में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में कैद हो गई है, जिससे यह साफ है कि वारदात को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है।

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सिर्फ ‘सबूतों वाले मोबाइल’ पर हाथ साफ, बाकी सामान सुरक्षित

शिकायतकर्ता अधिवक्ता आशीष प्रताप सिंह के मुताबिक, यह कोई साधारण चोरी की घटना नहीं थी, बल्कि केस के मुख्य एविडेंस (Evidence) को नष्ट करने की एक सोची-समझी साजिश थी:

  • टारगेटेड चोरी: चोर ऑफिस के भीतर घुसा और उसने पैसे या अन्य किसी कीमती इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर हाथ नहीं डाला। उसका पूरा फोकस केवल उसी एक मोबाइल फोन पर था, जिसमें वर्ष 2020 के कोरोना काल के दौरान नियमों को ताक पर रखकर किए गए एक कार्यालय उद्घाटन के वीडियो, फोटो और महत्वपूर्ण दस्तावेज सेव थे।

  • CCTV में कैद हुआ चेहरा: हालांकि, चोर की यह चालाकी दफ्तर में लगे कैमरों से नहीं छिप सकी। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सौंप दी गई है, जिसमें चोर मोबाइल चुराते हुए साफ दिखाई दे रहा है।

क्या है पूरा मामला और क्यों फंसे हैं तोमर?

यह पूरा विवाद साल 2020 के कोरोना काल (Covid Pandemic) से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उस दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री (और वर्तमान मप्र विधानसभा अध्यक्ष) नरेंद्र सिंह तोमर ने सख्त सरकारी गाइडलाइंस और कोविड प्रतिबंधों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए एक भव्य राजनीतिक कार्यालय का उद्घाटन किया था।

  • हाई कोर्ट के आदेश पर FIR: स्थानीय प्रशासन द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर अधिवक्ता आशीष प्रताप सिंह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कड़े आदेश पर इस मामले में नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी।

साक्ष्य अभी बाकी हैं… – शिकायतकर्ता का पुलिस की कार्यप्रणाली पर तंज

मोबाइल चोरी हो जाने के बाद भी शिकायतकर्ता वकील के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि आरोपियों की यह चाल उन पर ही उलटी पड़ने वाली है:

“चोरों को लगा कि मोबाइल गायब करने से केस खत्म हो जाएगा, लेकिन वे भूल गए कि मैं कानून का रखवाला हूं। नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ मौजूद सभी वीडियो, फोटो और कानूनी दस्तावेजों की चार बैकअप कॉपियां (प्रतियां) मेरे पास पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिन्हें मैं बहुत जल्द जांच टीम और कोर्ट को सौंपने जा रहा हूं।”

यूपी पुलिस जैसी सुस्ती? शिकायतकर्ता ने स्थानीय पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मामले को गंभीरता से लेने और नए साक्ष्यों को अपनी सिपुर्दगी (कस्टडी) में लेने के बजाय, उलटे शिकायतकर्ता से ही अपने ही थाने में दर्ज हुई पुरानी एफआईआर की कॉपी मांगकर समय बर्बाद कर रही है।

इस हाई-प्रोफाइल चोरी के बाद मध्य प्रदेश में विपक्षी दलों को सरकार और विधानसभा अध्यक्ष को घेरने का एक और बड़ा मुद्दा मिल गया है। अब देखना यह होगा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस उस ‘स्पेशल चोर’ को कब तक दबोच पाती है।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि