जाइडस लाइफसाइंसेज की बड़ी उपलब्धि: कैंसर की सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा ‘कीट्रूडा’ का तैयार किया पहला किफायती विकल्प

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जाइडस लाइफसाइंसेज की बड़ी उपलब्धि: कैंसर की सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा ‘कीट्रूडा’ का तैयार किया पहला किफायती विकल्प

मुंबई / नई दिल्ली: भारतीय फार्मा दिग्गज जाइडस लाइफसाइंसेज (Zydus Lifesciences) ने कैंसर के इलाज को किफायती बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। कंपनी ने दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली कैंसर दवा कीट्रूडा (पेंब्रोलिज़ुमैब – Pembrolizumab) का दुनिया का पहला सार्वजनिक रूप से घोषित सस्ता विकल्प यानी बायोसिमिलर (Biosimilar) तैयार कर लिया है।

अमरीकी स्वास्थ्य नियामक यूएस एफडीए (US FDA) ने जाइडस की इस नई दवा (कोड: FYB206) की समीक्षा के लिए आवेदन स्वीकार कर लिया है, एफडीए से अंतिम स्वीकृति मिलते ही जाइडस अमेरिकी और कनाडाई बाजारों में इस दवा का किफायती संस्करण पेश करने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल हो जाएगी।

क्यों खास है यह नई दवा?

कीट्रूडा (Keytruda) मर्क (MSD) द्वारा बनाई जाने वाली एक बेहद असरदार दवा है, जो पीडी-1 (PD-1) रिसेप्टर को ब्लॉक करके कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकती है।  इसका इस्तेमाल त्वचा (मेलानोमा), फेफड़े, ब्रेस्ट, पेट और गर्भाशय ग्रीवा समेत 19 अलग-अलग तरह के कैंसर के इलाज में किया जाता है।  कीट्रूडा की अत्यधिक महंगी कीमत के कारण कई मरीज इसका पूरा कोर्स नहीं कर पाते थे। जाइडस का यह विकल्प बाजार में आने से मरीजों के इलाज का खर्च काफी कम हो जाएगा।

जाइडस के मैनेजिंग डायरेक्टर शार्विल पी. पटेल ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य केवल दवा बेचना नहीं, बल्कि मरीजों तक अगली पीढ़ी के आधुनिक कैंसर इलाज को आसान और सुलभ बनाना है।

वैश्विक बाजार और मर्क के साथ पेटेंट की होड़

कीट्रूडा बिक्री के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी बायोलॉजिक दवा है।

विवरणआंकड़े / जानकारी
मर्क (MSD) की वार्षिक बिक्री (2025)

$31.7 अरब डॉलर

2026 की पहली छमाही (H1) की बिक्री

$16.40 अरब डॉलर

मूल पेटेंट समाप्ति की तिथि

वर्ष 2028 (अतिरिक्त पेटेंट से 2031 तक संभव)

स्वीकृति का संभावित समय (FDA)

वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही (Q3)

जाइडस ने इस बायोसिमिलर दवा का विकास अपनी साझेदार कंपनी फॉर्मिकॉन एजी (Formycon AG) के साथ मिलकर किया है। समझौते के तहत जाइडस के पास अमेरिका और कनाडा में इसे बेचने के विशेष अधिकार होंगे, जबकि फॉर्मिकॉन सप्लाई और रेगुलेटरी काम देखेगी।

चरण-3 ट्रायल के बिना तेजी से विकास

जाइडस और फॉर्मिकॉन के लिए एक बड़ी सफलता यह रही कि यूएस एफडीए की विशेष सहमति से इस दवा को तीसरे चरण (Phase-3) के लंबे क्लिनिकल ट्रायल के बिना ही विकसित कर लिया गया, जिससे विकास प्रक्रिया में लगने वाले कई वर्षों की बचत हुई।

ऐतिहासिक रूप से एफडीए द्वारा समीक्षा के लिए स्वीकार किए गए बायोसिमिलर आवेदनों की मंजूरी दर 90 प्रतिशत से अधिक रही है। हालांकि, मर्क (Merck) अपने पेटेंट की सुरक्षा के लिए कानूनी कदम उठा सकती है, साथ ही सिप्ला, बायोकॉन और सैंडोज़ जैसी अन्य दिग्गज फार्मा कंपनियां भी इसके विकल्प विकसित करने की रेस में बनी हुई हैं।