भोपाल: नए आपराधिक कानूनों (BNS, BNSS, BSA) के डिजिटल क्रियान्वयन पर राज्य स्तरीय महा-कार्यशाला 28 जून को
भोपाल: नए आपराधिक कानूनों (BNS, BNSS, BSA) के डिजिटल क्रियान्वयन पर राज्य स्तरीय महा-कार्यशाला 28 जून को
भोपाल: नए आपराधिक कानूनों (BNS, BNSS, BSA) के डिजिटल क्रियान्वयन पर राज्य स्तरीय महा-कार्यशाला 28 जून को
कटनी: भारत सरकार द्वारा देश की पुरानी दंड व्यवस्था को बदलकर लागू किए गए तीन नए ऐतिहासिक आपराधिक कानूनों के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर मध्य प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। आगामी 28 जून (रविवार) को सुबह 9:30 बजे से राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार (मिंटो हॉल) में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला (State Level Workshop) का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का मुख्य फोकस नए कानूनों को डिजिटल रूप से सशक्त और पारदर्शी तरीके से लागू करना है।
ICJS के जरिए मजबूत होगा न्याय प्रणाली का डिजिटल नेटवर्क
यह विशेष कार्यशाला Interoperable Criminal Justice System (ICJS) के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली के पांच मुख्य स्तंभों के बीच डिजिटल समन्वय को अत्यधिक मजबूत करना है, ताकि मुकदमों और जांच की प्रक्रिया में तेजी आ सके। ये पांच स्तंभ हैं:
- पुलिस (Police)
- न्यायपालिका (Judiciary)
- अभियोजन (Prosecution)
- कारागार (Prisons)
- फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL)
इन तीन नए कानूनों पर होगा मुख्य मंथन
कार्यशाला में देश की कानूनी व्यवस्था में हुए निम्नलिखित बड़े बदलावों के प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीतियों पर गहन विमर्श किया जाएगा:
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) – (जिसने IPC की जगह ली है)
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) – (जिसने CrPC की जगह ली है)
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) – (जिसने साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह ली है)
प्रदेशभर के वरिष्ठ अधिकारी और न्यायाधीश होंगे शामिल
इस उच्च स्तरीय तकनीकी और कानूनी कार्यशाला में पूरे मध्य प्रदेश से न्याय और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दिग्गज जुटेंगे:
- सभी जिलों के माननीय न्यायाधीश (Judges) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (IPS व SP स्तर के अधिकारी)।
- प्रदेशभर के अभियोजन अधिकारी (Prosecution Officers), जेल अधीक्षक और फॉरेंसिक साइंस विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक।
- चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े मेडिकल ऑफिसर्स, जिनकी भूमिका मेडिको-लीगल मामलों (MLC) में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य: नए कानूनों के तहत अब एफआईआर से लेकर कोर्ट के फैसले और फॉरेंसिक साक्ष्यों को डिजिटल तरीके से कैसे तेजी से इंटरलिंक किया जाए, इसकी रूपरेखा तैयार करना। साथ ही सभी विभागों के बीच आपसी तालमेल की व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर कर न्याय प्रणाली को और अधिक त्वरित व नागरिक-अनुकूल बनाना है।








