तिरुमाला मंदिर में नई नीति लागू होने से पहले भक्तों ने बरसाया धन, मात्र 10 घंटे में मिला ₹96.98 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ दान
तिरुमाला मंदिर में नई नीति लागू होने से पहले भक्तों ने बरसाया धन, मात्र 10 घंटे में मिला ₹96.98 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ दान

तिरुमाला मंदिर में नई नीति लागू होने से पहले भक्तों ने बरसाया धन, मात्र 10 घंटे में मिला ₹96.98 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ दान
तिरुपति/आंध्र प्रदेश: कलियुग के वैकुंठम कहे जाने वाले तिरुमाला पहाड़ियों पर स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर स्वामी (तिरुपति बालाजी) मंदिर में दान का एक ऐसा अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित हुआ है, जिसने देश के सभी मंदिरों के इतिहास को पीछे छोड़ दिया है। मंदिर के इतिहास में पहली बार मात्र 10 घंटों के भीतर रिकॉर्ड तोड़ 96.98 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ है।
दरअसल, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड द्वारा आम भक्तों के दर्शन को आसान बनाने के लिए एक नई दान नीति (Donation Policy) लागू की जा रही थी। इस नई नीति के प्रभावी होने से ठीक पहले, पुरानी वीआईपी सुविधाओं और विशेषाधिकारों का आखिरी बार लाभ उठाने के लिए दानदाताओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से धन की वर्षा कर दी।
दोपहर 2 बजे घोषणा और रात 12 बजे तक ‘महा-दान’ की होड़
यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड तब बना जब टीटीडी की शासी परिषद ने दान योजना में बड़े बदलावों की घोषणा की:
- 10 घंटे का अल्टीमेटम: इस महीने की 14 तारीख को दोपहर 2 बजे टीटीडी बोर्ड की बैठक के निर्णयों की जानकारी साझा की गई। कार्यकारी अधिकारी (EO) ने स्पष्ट किया कि दानदाताओं को मिलने वाली पुरानी वीआईपी सुविधाएं केवल 14 तारीख की मध्यरात्रि 12 बजे तक ही मान्य रहेंगी, जिसके बाद नई नीति लागू हो जाएगी।
- तिजोरियां खाली कीं: दोपहर 2 बजे घोषणा होने के बाद दानदाताओं के पास केवल 10 घंटे का समय बचा था। पुरानी व्यवस्था के तहत लाइफटाइम वीआईपी और विशेष दर्शन की सुविधाएं सुरक्षित करने के लिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने डिजिटल ट्रांजैक्शन और ऑफलाइन काउंटरों पर लाइन लगा दी।
दानदाताओं का पूरा गणित: किसने कितना दिया चंदा?
TTD द्वारा जारी किए गए आधिकारिक और बेहद दिलचस्प आंकड़ों के अनुसार, इस 10 घंटे की लघु अवधि में छोटे से लेकर बड़े दानदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:
- डिजिटल/ऑनलाइन दानदाता: 2,354 श्रद्धालुओं ने घर बैठे इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल मोड के माध्यम से अपनी राशि ट्रांसफर की।
- ऑफलाइन दानदाता: 106 श्रद्धालु ऐसे थे जिन्होंने तिरुमाला पहुंचकर सीधे काउंटरों पर नकद/चेक जमा कराया।
- ₹1 लाख से ₹10 लाख के बीच: कुल 1,212 श्रद्धालुओं ने इस श्रेणी में योगदान दिया।
- ₹10 लाख से ₹25 लाख के बीच: इस मध्यम-उच्च वर्ग में 1,246 दानदाता शामिल हुए।
- ₹1 करोड़ या उससे अधिक: देश के दो बड़े दिग्गज उद्योगपतियों ने 1 करोड़ रुपये से अधिक का व्यक्तिगत महा-दान दिया।
- इस बंपर डोनेशन के साथ ही 26 जून तक टीटीडी में कुल पंजीकृत दानदाताओं की संख्या बढ़कर 1,97,888 तक पहुंच चुकी है। तिरुमाला मंदिर में नई नीति लागू होने से पहले भक्तों ने बरसाया धन, मात्र 10 घंटे में मिला ₹96.98 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ दान
पुरानी दान नीति का वो ‘आकर्षण’, जिसके लिए मची होड़
श्रद्धालुओं के बीच मची इस होड़ की मुख्य वजह पुरानी नीति के तहत मिलने वाले शानदार वीआईपी ब्रेक दर्शन (VIP Break Darshan) और सुप्रभातम सेवा के विशेषाधिकार थे, जो इस प्रकार तय थे:
- ₹1 लाख के दान पर: साल में एक बार ₹300 मूल्य का विशेष दर्शन टिकट।
- ₹2 लाख से ₹5 लाख पर: साल में 1 से 3 बार तक ‘सुपथम’ द्वार के माध्यम से त्वरित दर्शन।
- ₹10 लाख के दान पर: वर्ष में एक बार सुपथम और एक बार प्रतिष्ठित VIP ब्रेक दर्शन की पात्रता।
- ₹15 लाख से ₹25 लाख पर: साल में 2 से 3 बार VIP ब्रेक दर्शन और 3 बार तक सुपथम प्रवेश।
- ₹50 लाख से ₹75 लाख पर: 3 बार VIP दर्शन, 4 बार सुपथम और कुल 10 से 12 सुप्रभातम सेवा टिकट।
- ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ या अधिक: साल में 3 से 4 बार VIP दर्शन, 4 बार सुपथम और कुल 20 से 40 सुप्रभातम सेवा टिकटों का महा-विशेषाधिकार।
क्यों बदलनी पड़ी TTD को अपनी दान नीति?
टीटीडी बोर्ड के सदस्यों के अनुसार, आम श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ रही भारी भीड़ और उनके दर्शन के समय को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था। समिति के अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि दानदाताओं को मिलने वाले अत्यधिक वीआईपी कोटे के कारण आम और गरीब श्रद्धालुओं को भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए 20 से 30 घंटे तक कतारों में इंतजार करना पड़ता था।
इसी विसंगति को दूर करने, वीआईपी कल्चर को कम करने और आम भक्तों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से सुविधाओं में कुछ कटौती करते हुए इस नई सख्त दानदाता नीति को लागू किया गया है।
— विशेष धार्मिक ब्यूरो, यशभारत डॉट कॉम






