Monday, April 20, 2026
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Investment: गोल्ड सेविंग स्कीम में निवेश से पहले सावधान, सस्ता सौदा नहीं, बढ़ सकता है खर्च

Investment: गोल्ड सेविंग स्कीम में निवेश से पहले सावधान, सस्ता सौदा नहीं, बढ़ सकता है खर्च। किस्तों में सोना खरीदना आजकल आम हो गया है और कई ज्वेलर्स गोल्ड सेविंग स्कीम्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। हालांकि, यह स्कीम जितनी आसान दिखती है, उतनी ही सावधानी की भी मांग करती है। कई मामलों में ग्राहक बिना पूरी जानकारी के जुड़ जाते हैं और बाद में अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ता है।

Investment: गोल्ड सेविंग स्कीम में निवेश से पहले सावधान, सस्ता सौदा नहीं, बढ़ सकता है खर्च

कैसे काम करती है स्कीम?

ज्यादातर ज्वेलर्स 10 से 11 महीनों की स्कीम चलाते हैं, जिसमें ग्राहक हर महीने एक तय रकम जमा करते हैं। मैच्योरिटी पर इसी रकम से गहने खरीदे जा सकते हैं। कई बार ज्वेलर एक महीने की किस्त के बराबर बोनस या मेकिंग चार्ज में छूट भी देता है।

सबसे बड़ी गलतफहमी

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन स्कीम्स में ग्राहक सोना पहले से तय कीमत पर नहीं खरीदते, बल्कि सिर्फ पैसे जमा करते हैं। गहने खरीदते समय उस दिन का बाजार भाव लागू होता है। ऐसे में अगर सोने के दाम बढ़ जाते हैं, तो ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।

मेकिंग चार्ज का जाल

कई स्कीम्स “मेकिंग चार्ज फ्री” या छूट का दावा करती हैं, लेकिन इसके साथ कई शर्तें जुड़ी होती हैं। यह छूट सीमित डिजाइनों या तय सीमा तक ही लागू होती है। पसंद का डिजाइन लेने पर ग्राहकों को भारी मेकिंग चार्ज देना पड़ सकता है।

 नियम तोड़े तो नुकसान

इन स्कीम्स में समय पर किस्त जमा करना जरूरी होता है। अगर कोई ग्राहक किस्त चूक जाता है या स्कीम बीच में छोड़ देता है, तो उसे बोनस या अन्य लाभ नहीं मिलते। कुछ मामलों में जमा राशि पर भी नुकसान हो सकता है।

कब फायदेमंद है?

गोल्ड स्कीम तब फायदेमंद होती है, जब ग्राहक पहले से तय कर चुके हों कि उन्हें शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने हैं। ऐसे में यह एक तरह का सेविंग प्लान बन जाता है।

 एक्सपर्ट सलाह

स्कीम में निवेश करने से पहले ज्वेलर की साख, शर्तें, बोनस की गणना और रिडेंप्शन नियमों को ध्यान से समझना जरूरी है। साथ ही यह भी जान लेना चाहिए कि अगर बीच में स्कीम छोड़नी पड़े तो क्या नुकसान होगा।कुल मिलाकर, गोल्ड सेविंग स्कीम एक आसान बचत विकल्प जरूर है, लेकिन इसे निवेश समझकर जुड़ना भारी पड़ सकता है। सही जानकारी और समझ के साथ ही इसमें शामिल होना बेहतर रहेगा।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम