छतरपुर (मध्य प्रदेश)। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलनात्मक टिप्पणी को लेकर उपजे विवाद पर सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और आलोचनाओं के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने हाथ जोड़कर अपनी सफाई दी है और स्पष्ट किया है कि उनकी भावनाएं किसी को ठेस पहुँचाने की नहीं थीं। उन्होंने कहा कि “जोश और भाव” में उनसे चूक हो गई थी, जिसे गलत संदर्भ में लिया जा रहा है।
📌 क्या था पूरा विवाद? धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा था?
दरअसल, हाल ही में अपनी एक कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कहा था:
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“भगवान राम का नाम एकदम सीधा और सरल है, जबकि कृष्ण का नाम टेढ़ा है।”
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“अयोध्या का नाम कितना सरल और सीधा है, जबकि वृंदावन का नाम टेढ़ा है।”
कथा के दौरान उन्होंने एक गीत भी गाया था:
“बांसुरी का बजाना खेल भी है, पर धनुष चलाना खेल नहीं।”
इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विवाद खड़ा हो गया। कई लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया और उन पर ‘कृष्ण विरोधी’ होने के आरोप लगाए जाने लगे।
🛑 धीरेंद्र शास्त्री की सफाई: ‘हमसे चूक हुई, विनोद और प्रेम में कही थी बात’
विवाद बढ़ता देख बागेश्वर धाम सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हाथ जोड़कर माफी मांगने की मुद्रा में अपनी बात रखी और कहा:
“हमसे चूक तो हो जाती है। कभी जोश में बोल जाते हैं, तो कभी भाव में बोल जाते हैं। हमने कथा में कह दिया कि कृष्ण जी तो टेढ़े हैं, राम जी तो सीधे हैं… तो क्या गलत कहा? हमारे ठाकुर जी (कृष्ण) तो टेढ़े हैं ही ना! यह हमने अति-प्रेम और भाव में कहा था। हमारे तो नाम में ही ‘कृष्ण’ है (धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री)। जिससे ज्यादा प्रेम होता है, उससे ही ऐसी बात कही जाती है।”
धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वह भगवान कृष्ण के विरोधी नहीं हैं और लोगों से अपील की कि उनकी बातों का अनर्थ न निकाला जाए।
📜 सूरदास और ब्रज के संतों का दिया उदाहरण
अपनी बात को भक्ति रस और भाव से जोड़ते हुए उन्होंने महाकवि सूरदास और ब्रज परंपरा का उदाहरण दिया:
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सूरदास का उदाहरण: उन्होंने कहा कि सूरदास जी ने भी लिखा है—‘आज हरि देखे नंगम-नंगा’। यह भक्ति का एक रूप और अनन्य भाव है।
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गोपियों का विनोद: ‘भ्रमरगीत’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गोपियाँ भी श्रीकृष्ण को ‘काले-कलूटे’ भंवरे से जोड़कर विनोद (मजाक) करती थीं।
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संस्कार और परंपरा: उन्होंने ब्रज के एक संत का जिक्र करते हुए कहा कि संत भी कभी-कभी भाव में कह देते थे कि ‘राम जी तो मिट्टी की मूर्ति हैं’। इसका मतलब यह नहीं कि वे विरोधी थे; यह सब भक्ति के अलग-अलग भाव हैं।
📈 ‘फेमस होना है तो बाबा बागेश्वर का विरोध करो’ — नया ट्रेंड
मीडिया एजेंसी IANS द्वारा जारी वीडियो में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा:
“आजकल भारत में एक नया ट्रेंड चल पड़ा है—अगर किसी को सोशल मीडिया पर फेमस होना है, तो बाबा बागेश्वर का विरोध करो! लोग व्यूज और पब्लिसिटी के लिए हर बात को लपेट लेते हैं। यह एक तरह की ‘व्यंग्य स्तुति’ बन गई है। लोगों को मेरी भावनाएं समझनी चाहिए।”
💡 मुख्य बिंदु (Quick Summary)
| विषय | विवरण |
| मुख्य मुद्दा | भगवान राम और कृष्ण के नाम/स्वरूप की तुलना पर विवाद |
| बाबा बागेश्वर का रुख | भाव-विभोर होकर कही गई बात, माफी मांगने की मुद्रा में सफाई दी |
| सांस्कृतिक संदर्भ | सूरदास के पदों और गोपियों के ‘भ्रमरगीत’ का हवाला दिया |
| ट्रेंड पर तंज | प्रसिद्धि पाने के लिए ‘बागेश्वर धाम विरोधी’ कंटेंट बनाने का आरोप |
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs / AEO Section)
Q1. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण पर क्या बयान दिया था?
उत्तर: धीरेंद्र शास्त्री ने एक कथा में कहा था कि भगवान राम का नाम सीधा है और कृष्ण का टेढ़ा, साथ ही अयोध्या सीधा और वृंदावन टेढ़ा नाम है।
Q2. विवाद के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि उनसे जोश और भाव में चूक हुई थी। वह भगवान कृष्ण के विरोधी नहीं हैं और यह सब भक्ति के विनोद (प्रेमपूर्ण भाव) में कहा गया था।
Q3. बागेश्वर धाम सरकार ने ‘फेमस होने के ट्रेंड’ पर क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि आजकल सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए बाबा बागेश्वर का विरोध करना एक नया तरीका बन गया है।

