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Asaram Bapu Case: आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से झटका; उम्रकैद की सजा बरकरार, तुरंत सरेंडर करने का आदेश

Asaram Bapu Case: आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से झटका; उम्रकैद की सजा बरकरार, तुरंत सरेंडर करने का आदेश

जोधपुर: नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में जोधपुर जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने आसाराम की उम्रकैद की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने आज (बुधवार, 27 मई 2026) यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

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अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए फिलहाल अंतरिम जमानत (पैरोल) पर बाहर चल रहे आसाराम को तुरंत सरेंडर करने का आदेश जारी किया है। गौर करने वाली बात यह है कि महज दो दिन पहले ही उनकी जमानत की अवधि को 7 जुलाई तक बढ़ाया गया था, लेकिन अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उन्हें वापस जेल जाना होगा।

सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को बड़ी राहत, हुए बरी

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में आसाराम सहित तीन आरोपियों द्वारा निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर की गई अपीलों पर एक साथ सुनवाई की। अदालत ने जहाँ मुख्य आरोपी आसाराम की सजा में किसी भी तरह के बदलाव से इनकार कर दिया, वहीं इस केस में सह-आरोपी रहीं शिल्पी और शरतचंद को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में इन दोनों को इस मामले से बरी कर दिया है। Asaram Bapu Case: आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से झटका; उम्रकैद की सजा बरकरार, तुरंत सरेंडर करने का आदेश

2018 में पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद

यह पूरा मामला अगस्त 2013 का है, जब जोधपुर के मणाई स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न और रेप का आरोप लगा था।

  • गिरफ्तारी और सजा: सितंबर 2013 में आसाराम की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जोधपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी पाते हुए मरते दम तक जेल (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई थी।

  • सह-आरोपियों की सजा: ट्रायल कोर्ट ने शिल्पी और शरतचंद को भी दोषी मानते हुए 20-20 साल की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने पलट दिया है।

हाईकोर्ट में हुई थी ‘डे-टू-डे’ (रोजाना) सुनवाई

निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में इस साल 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक डे-टू-डे (नियमित) सुनवाई की गई थी। इस दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष (Prosecution) के बीच तीखी बहस हुई थी। सभी दलीलें, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट को दोबारा परखने के बाद बेंच ने 20 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया।

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