मध्यप्रदेश

फर्जी मार्कशीट से शिक्षक बने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज; STF की जांच में हुआ खुलासा

फर्जी मार्कशीट से शिक्षक बने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज; STF की जांच में हुआ खुलासा

फर्जी मार्कशीट से शिक्षक बने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज; STF की जांच में हुआ खुलासा

ग्वालियर: फर्जी दस्तावेजों के सहारे शिक्षा विभाग में सरकारी शिक्षक की नौकरी हथियाने के एक गंभीर मामले में ग्वालियर के चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी शिक्षक हाकम परमार की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) अर्जी को पूरी तरह से नामंजूर कर दिया है। आरोपी के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज किया गया है।

खुफिया जानकारी से खुला फर्जीवाड़े का राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब एसटीएफ भोपाल (ग्वालियर यूनिट) को एक मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कुछ लोग शिक्षक के पद पर काम कर रहे हैं। इस सूचना के बाद एसटीएफ ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की और आरोपी हाकम परमार द्वारा जमा की गई वर्ष 2003 की डीएड (Diploma in Education) की अंकसूची का सत्यापन कराया।

जब एसटीएफ ने माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल से इस अंकसूची का रिकॉर्ड मांगा, तो मंडल ने लिखित में पुष्टि की कि उनके रिकॉर्ड से ऐसी कोई अंकसूची कभी जारी ही नहीं की गई थी। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी, इंदौर से मिली रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि आरोपी वर्तमान में इंदौर जिले में एक सरकारी प्राथमिक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा था और सरकारी खजाने से वेतन उठा रहा था।

एसटीएफ ने दर्ज की गंभीर धाराएं

दस्तावेजों के फर्जी पाए जाने के बाद एसटीएफ ने आरोपी हाकम परमार और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है:

  • धारा 420 (धोखाधड़ी): विभाग को गुमराह कर नौकरी हासिल करने के लिए।
  • धारा 468 (जालसाजी): धोखाधड़ी के इरादे से फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए।
  • धारा 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग): नकली अंकसूची को असली बताकर विभाग में पेश करने के लिए।
  • धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र): इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए रची गई साजिश के तहत।

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

सनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। दलील दी गई कि आरोपी की उम्र 49 वर्ष है और वह एक स्थायी शासकीय सेवक है। वह पुलिस की विवेचना (जांच) में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार है। वकील ने यह भी कहा कि आरोपी के फरार होने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोई गुंजाइश नहीं है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

दूसरी तरफ, शासन की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) ने इस जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि यह मामला सीधे तौर पर सरकारी व्यवस्था और शिक्षा विभाग के साथ बड़ा धोखा है। चूंकि मामले की विवेचना अभी शुरुआती दौर में है और इसमें कई अन्य कड़ियों का जुड़ना बाकी है, इसलिए आरोपी को जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है। फर्जी मार्कशीट से शिक्षक बने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज; STF की जांच में हुआ खुलासा

कोर्ट का सख्त फैसला

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अभियोजन के तर्कों से सहमति जताई। कोर्ट ने माना कि जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाना एक गंभीर और संगठित अपराध की श्रेणी में आता है। जांच के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आरोपी शिक्षक की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद अब एसटीएफ द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।

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