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अजमेर दरगाह या मंदिर : जानिए कौन हैं विष्णु गुप्ता जिसने किया ऐसा दावा, क्या है पूरा मामला?

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अजमेर दरगाह या मंदिर : जानिए कौन हैं विष्णु गुप्ता जिसने किया ऐसा दावा, क्या है पूरा मामला?। हिंदू सेना प्रमुख विष्णु गुप्ता इस वक्त चर्चा में हैं। विष्णु ने एक सिविल मुकदमे में दावा किया है कि अजमेर दरगाह एक मंदिर के ऊपर बनाई गई थी। अजमेर की अदालत ने अजमेर दरगाह समिति सहित तीन पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, दरगाह दीवान के उत्तराधिकारी ने कहा कि यह वाद सिर्फ सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए है।

अजमेर दरगाह या मंदिर : जानिए कौन हैं विष्णु गुप्ता जिसने किया ऐसा दावा, क्या है पूरा मामला?

राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया है। यह विवाद हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की एक याचिका के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि दरगाह स्थल पर शिव मंदिर था। अदालत ने इस मामले को सुनवाई के योग्य मानते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होनी है। इस बीच, अजमेर दरगाह के खादिमों ने दरगाह स्थल पर मंदिर के दावों को खारिज करते हुए कहा कि विष्णु गुप्ता की याचिका का मकसद सिर्फ देश के सांप्रदायिक सद्भाव को खतरे में डालना है।
पहले जानते हैं कि विष्णु गुप्ता क्यों चर्चा में हैं?
हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता ने एक सिविल मुकदमा दाखिल किया है, जिसमें दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह एक शिव मंदिर के ऊपर बनाई गई थी और इसे भगवान संकटमोचन महादेव विराजमान मंदिर घोषित किया जाना चाहिए। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मनमोहन चंदेल ने 27 नवंबर को मुकदमे के प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। जिन तीन पक्षों को नोटिस जारी किया गया है उनमें अजमेर दरगाह समिति, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय शामिल हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी।

हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अधिवक्ता शशि रंजन कुमार सिंह के जरिए दरगाह समिति को परिसर से हटाने की मांग करते हुए यह मुकदमा दायर किया है। इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई को दरगाह का सर्वेक्षण करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि मुख्य प्रवेश द्वार पर छत का डिजाइन हिंदू संरचना जैसा दिखता है, जो दर्शाता है कि यह स्थल मूल रूप से एक मंदिर था।

विष्णु गुप्ता ने अपनी याचिका में आगे तर्क दिया है कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जो दर्शाता हो कि अजमेर दरगाह खाली जमीन पर बनाई गई थी। इसके बजाय, ऐतिहासिक विवरण बताते हैं कि इस स्थल पर महादेव मंदिर और जैन मंदिर थे, जहां हिंदू भक्त अपने देवताओं की पूजा करते थे। इसलिए, मुकदमे में केंद्र सरकार को विवादित संपत्ति के स्थल पर भगवान संकटमोचन महादेव मंदिर के पुनर्निर्माण के निर्देश देने की मांग की गई है।

हालांकि, दरगाह दीवान के उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि यह वाद सिर्फ सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए है। यह हिंदुस्तान की वह दरगाह है, जिससे पूरी दुनिया के हर मजहब का आदमी जुड़ा हुआ है। हर मजहब के आदमी की आस्था दरगाह से जुड़ी हुई है। इस दरगाह की तारीख कोई सौ दो सौ साल पुरानी नहीं, लगभग 850 साल पुरानी है। सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि न्याय प्रक्रिया पर हम लोग नजर लगाए हुए हैं। हम अपने वकीलों से राय ले रहे हैं। हम वकीलों से आगे की प्रक्रिया की राय ले रहे हैं। जैसे ही हमें  विशेषज्ञों का सुझाव मिलेगा, उसके अनुसार हम आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे।  अजमेर दरगाह या मंदिर : जानिए कौन हैं विष्णु गुप्ता जिसने किया ऐसा दावा, क्या है पूरा मामला?

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