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20 साल बाद सऊदी की जेल से छूटा अब्दुल रहीम; केरल के लोगों ने 4 दिन में जुटाए थे ₹34 करोड़ की ‘ब्लड मनी’, मां से लिपटकर रोया बेटा

कोझिकोड (केरल): “मैं उन सभी लोगों का दिल से आभारी हूँ जिन्होंने मेरी मदद की और मुझे मेरी माँ को दोबारा देखने का यह दूसरा जीवन दिया…” यह शब्द केरल के कोझिकोड के रहने वाले अब्दुल रहीम के हैं, जो 20 साल तक सऊदी अरब की जेल में मौत की सजा (Death Penalty) का सामना करने के बाद आखिरकार सकुशल अपने घर लौट आए हैं।

अब्दुल रहीम की वतन वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं है। सऊदी अरब के सख्त कानूनों के तहत उन्हें फांसी के फंदे से बचाने के लिए ₹34 करोड़ (15 मिलियन सऊदी रियाल) की भारी-भरकम ‘ब्लड मनी’ (खून के बदले मुआवजा) चुकानी थी। इस नामुमकिन से दिखने वाले काम को केरल के लोगों ने महज 4 दिनों के भीतर क्राउड फंडिंग (Crowd Funding) के जरिए पैसे जुटाकर मुमकिन कर दिखाया।

एयरपोर्ट पर छलके आंसू, बकरीद पर दोगुनी हुई खुशियां

अब्दुल रहीम जब करिपुर एयरपोर्ट पर उतरे, तो अपनों को देखकर उनके सब्र का बांध टूट गया और वह फफक-फफक कर रो पड़े। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए मशहूर उद्योगपति बॉबी चेम्मनूर सहित हजारों की संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।

  • दो दशक का इंतजार: रहीम साल 2006 में अपने परिवार की गरीबी दूर करने और बेहतर कमाई के सपने लेकर सऊदी अरब गए थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

  • ईद का सबसे बड़ा तोहफा: रहीम की घर वापसी ठीक बकरीद के दिन हुई। उनके दोस्तों और स्थानीय निवासियों ने कहा, “त्योहार के दिन रहीम का वापस आना हमारी खुशियों को हजार गुना बढ़ा गया है। यह हमारी जिंदगी की सबसे खूबसूरत ईद है।”

 जब 20 साल बाद मां से मिला बेटा: थम गईं सबकी सांसें

घर पहुँचते ही जैसे ही रहीम ने दरवाजे पर सफेद साड़ी पहने अपनी बूढ़ी माँ को देखा, वह उनसे लिपट गए। माँ पिछले दो दशकों से हर दिन अपने बेटे की राह तक रही थी।

भावुक कर देने वाला नजारा: दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर काफी देर तक रोते रहे। वहां मौजूद हजारों की भीड़ की आंखें भी इस नजारे को देखकर नम हो गईं। रहीम अपनी मां को बार-बार चूम रहे थे और रोने के कारण कुछ देर तक मीडियाकर्मियों से बात भी नहीं कर पाए।

क्या था मामला? सिर्फ 4 दिन में कैसे पलटी किस्मत

यह पूरी दास्तान जितनी दर्दनाक है, इसका अंत उतना ही मानवीय और प्रेरणादायी है:

  • 2006 का वो हादसा: सऊदी अरब पहुंचने के कुछ ही समय बाद रहीम को एक दिव्यांग सऊदी लड़के की देखरेख की नौकरी मिली। लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में उस लड़के की गलती से मौत हो गई। इसका आरोप रहीम पर लगा और उन्हें जेल भेज दिया गया।

  • 2018 में मौत की सजा: लड़के के परिवार ने शुरुआत में रहीम को माफ करने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद साल 2018 में सऊदी की अदालत ने उन्हें मौत की सजा (फांसी) सुना दी।

  • 34 करोड़ की ‘ब्लड मनी’: लंबे समय की बातचीत के बाद पीड़ित परिवार 15 मिलियन सऊदी रियाल (करीब ₹34 करोड़) का मुआवजा लेकर रहीम को जीवनदान देने पर राजी हुआ।

  • केरल की ऐतिहासिक एकजुटता: कोर्ट ने पैसे जमा करने के लिए 18 अप्रैल, 2024 की आखिरी समय-सीमा (Deadline) तय की थी। समय कम था और रकम बहुत बड़ी, लेकिन केरल के लोगों, सामाजिक संगठनों और अप्रवासी भारतीयों (NRIs) ने मिलकर एक बड़ा अभियान चलाया और महज 4 दिनों के भीतर ₹34 करोड़ का फंड इकट्ठा कर सीधे सऊदी अरब भिजवाया।

कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद आखिरकार अब्दुल रहीम को रिहा कर दिया गया और वह एक आजाद इंसान के रूप में अपने देश, अपनी माटी और अपनी मां के पास वापस लौट आए हैं। सोचने की बात यह है कि‍ जि‍स देश में ब्‍लड मनी चुकाने के लि‍ए चार दि‍न में 34 कराेड रूपए इक्‍ठा कि‍ए जा सकते है।  वहां के लोग कमाने के नाम पर भारत जैसे देश को छोडकर वि‍देश जाने के लि‍ए क्‍यों उत्‍साहि‍त रहते है। सीधा सबक यह है कि‍ एक बात सोच ली जाए की वि‍देश कुछ है ही नहीं।   तो ऐसी नौबत भी नहीं आएगी।  देश के लि‍ए एक महत्‍वपूर्ण बात तू है तो मुझे फिर और क्या चाहिए  ….

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