10 वर्षों से संचालित सर्वसुविधायुक्त बीआरसी दफ्तर को शहर से हटाने साजिशपूर्ण कवायद,जनपद शिक्षा केंद्र(बीआरसी) कटनी को शसर से हटाने में षडयंत्र,शासकीय धन राशि का दुरुपयोग,वर्तमान में परिसर की आईसीटी लैब,में हाल ही में करीब ढाई लाख रुपये का सरकारी खर्चा पानी में बहेगा
कटनी में 10 साल से संचालित बीआरसी कार्यालय को हटाने की साजिश: आईसीटी लैब के ढाई लाख पानी में बहने की आशंका, शहरवासियों में आक्रोश
10 वर्षों से संचालित सर्वसुविधायुक्त बीआरसी दफ्तर को शहर से हटाने साजिशपूर्ण कवायद,जनपद शिक्षा केंद्र(बीआरसी) कटनी को शसर से हटाने में षडयंत्र,शासकीय धन राशि का दुरुपयोग,वर्तमान में परिसर की आईसीटी लैब,में हाल ही में करीब ढाई लाख रुपये का सरकारी खर्चा पानी में बहेगा
कटनी(YASHBHARAT.COM)।शहर के बीचोंबीच चांडक चौक, धंतीबाई स्कूल के पीछे विगत 10 वर्षों से संचालित सुविधा जनक जनपद शिक्षा केंद्र बीआरसी कार्यालय) को शहर से अन्यंत्र स्थानांतरित करने की कवायद शुरू हो गई है।
इस निर्णय से न केवल हजारों शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों को असुविधा होगी,शहर में बीआरसी दफ्तर को बेवजह हटाने के पीछे कोई स्पष्ट कारण समझ से परे है बल्कि ऐतिहासिक धरोहर पर भी संकट मंडरा रहा है।
सुविधायुक्त बीआरसी कार्यालय के स्थानांतरण में क्या मजबूरी?
शहर के बीच संचालित बीआरसी दफ्तर सुविधा युक्त होने के बावजूद इसके स्थानांतरण की आवश्यकता आखिर मजबूरी क्यों बन रही है। कही इसमें राजनीतिक दखलंदाजी तो नहीं है।
जब चांडक चौक स्थित वर्तमान परिसर पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त, सुरक्षित और सुलभ है, तो अचानक इसे शहर से बाहर भेजने की जल्दी क्यों है? इसमें शासकीय अपव्यय का जिम्मेदार कौन होगा।
आईसीटी लैब का नुकसान
वर्तमान परिसर की आईसीटी लैब में हाल ही में करीब 2,50,000/- (ढाई लाख रुपये)का सरकारी निवेश किया गया है।यदि कार्यालय अन्य भवन में शिफ्ट होगा तो सरकारी अपव्यय होगा।इसके अलावाकार्यालय का सामान शिफ्ट करने में ही 50,000 से 60,000 का अतिरिक्त सरकारी खर्च भी आएगा। जब सरकार के लाखों रुपये पहले से व्य हुए हैं, तो जनता के टैक्स के पैसे की इस बर्बादी और अतिरिक्त व्यय का जिम्मेदार कौन होगा?
बिना मीटिंग सलाह मशविरा के अनुचित फैसले से असंतोष
शिक्षा समिति के सदस्यों (स्कूलों के प्राचार्यों) से बिना कोई सलाह-मशविरा या चर्चा किए बिना इतना बड़ा फैसला किसके दबाव में लिया गया? शिक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसले में समन्वय और पारदर्शिता क्यों गायब है?
वर्तमान स्थान के 10 प्रमुख जनहितकारी कारण
शहर के मध्य होने से बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, दिव्यांगजन और ग्रामीण आसानी से पैदल या स्थानीय साधनों से पहुंच जाते हैं।10 वर्षों से स्थापित पहचान कटनी जिले के सभी शिक्षकों, अभिभावकों और आमजन को इस पते की भली-भांति जानकारी है।
ऐतिहासिक ‘गांधी चिंतन केंद्र’ की धरोहर
यह परिसर विगत 30-40 वर्षों से गांधी चिंतन केंद्र के रूप में महात्मा गांधी जी के विचारों, सत्य और अहिंसा की प्रेरणा का जीवंत केंद्र रहा है, जिसका संरक्षण बीआरसी कार्यालय द्वारा पिछले 10 वर्षों से किया जा रहा है।
सुरक्षित वातावरण व पर्याप्त पार्किंग मुख्य सड़क से हटकर होने के कारण यहां अराजक यातायात नहीं है, जिससे महिलाओं और बच्चों के लिए यह सुरक्षित है। वाहनों की पार्किंग हेतु भी पर्याप्त स्थान है।
प्रशिक्षण व बैठकों के लिए उपयुक्त
परिसर में बैठक, विभागीय प्रशिक्षण और कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त कमरे और खुला मैदान (पंडाल हेतु) उपलब्ध है।बस स्टैंड व अस्पताल नजदीक है ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले शिक्षकों व परिजनों के लिए बस स्टैंड, अस्पताल और दैनिक जरूरत की दुकानें बिल्कुल पास हैं।
शहरी स्कूलों से सहज समन्वय
शहर के मध्य होने के कारण विभागीय गतिविधियों का संचालन और संवाद आसानी से होता है। जनहित, ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा, और सरकारी धन के अपव्यय को रोकने के लिए बीआरसी कार्यालय को वर्तमान स्थान पर ही यथावत संचालित रखा जाए।इस निर्णय पर पुनः विचार करते हुए विद्यालयों के प्राचार्यों और जनप्रतिनिधियों से विधिवत परामर्श किया जाए।
अन्य भवन का उपयोग
यदि किसी अन्य शासकीय भवन का उपयोग करना ही है, तो बीआरसी की स्थापित व्यवस्था को छेड़े बिना उसका अन्य विभागीय उपयोग किया जा सकता है। कलेक्टर आशीष तिवारी से शहर के प्रबुद्धजनों ने इस जनसुलभ व्यवस्था को बचाकर संसाधनों का दुरुपयोग रोकने मांग की है।
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