आशीष शुक्ला..
जबलपुर। संस्कारधानी की संगमरमरी वादियों के साथ-साथ दशहरा और रामलीला के ऐतिहासिक आयोजनों के लिए भी जाना जाता है।
कोरोना संक्रमण के कारण शहर की शान पंजाबी दशहरा में पहली बार ऐसा हुआ जब 70 वर्ष बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले नहीं जले।
पंजाबी हिंदू एसोसिएशन ने इस बार ग्वारीघाट स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज मैदान में सार्वजनिक आयोजन नहीं किया। इसी तरह रामलीला के इतिहास में यह तीसरी बार स्थिति बनी जब मंचन को विराम दिया गया।
56 साल बाद ऐसी स्थिति बनी
दशहरे पर निकलने वाला मुख्य चल समारोह देशभर में ख्यात है। एक साथ मां दुर्गा के विविध रूपों को देखने के लिए सड़कों पर रतजगा होता था। इस बार ऐसा देखने नहीं मिलेगा।
शहर में 56 साल बाद ऐसी स्थिति बन रही है, जब चल समारोह नहीं निकलेगा। शहर में चल समारोह की परंपरा लगभग 150 साल पुरानी है। इससे पहले 1964 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के कारण
सार्वजनिक आयोजन नहीं हुए थे। इस बार कोरोना ने इतिहास में वर्ष 2020 को भी जोड़ दिया, जिसमें चल समारोह नहीं निकलेगा।










