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50-100 की गड्डी में निकल रहे कटे-फटे नोट, बैंक जमा करने से कर रहे इनकार

100 rupee notes

इंदौर। नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सभी नोट बदल दिए हैं। मगर 50-100 रुपए के पुराने नोट अभी भी चलन में है। इन नोटों की गड्डी में कटे-फटे नोट निकल रहे हैं। इन्हें बाजार में चलाने में लोगों को काफी मशक्कत करना पड़ रही है। बैंक भी इन्हें लेने में आनाकानी करने लगे हैं। जबकि नियमानुसार बैंक ऐसे नोटों को लेने से मना नहीं कर सकते।

तिलक नगर निवासी महेश बैरागी की पत्नी सुनीता ने अप्रैल में डाकघर से 10 हजार रुपए निकाले। इसमें 50 रुपए की एक गड्डी थी। इस गड्डी में 10 नोट कटे-फटे और गले निकले। पंद्रह दिन तक इन नोटों को बाजार में चलाने का प्रयास किया गया। आखिरी में महेश ने इन्हें अपने खाते में जमा करने का सोचा। जब वे बैंक पहुंचे तो पहले बैंककर्मी ने इन्हें जमा करने से मना कर दिया। काफी बहस के बाद बैंककर्मी ने कहा कि हमारी बैंक की चेस्ट ब्रांच नहीं है। इसके चलते हमें इन नोटों को चलाना काफी मुश्किल होगा। जबकि सोमेश के प्रकरण में बैंककर्मी का कहना था कि एटीएम से नोट निकला है। उसकी बैंक में जाकर नोट जमा कर दें। काफी बहस के बाद बैंककर्मी ने सोमेश से उक्त एटीएम की सारी जानकारी ली।

केस – 1 : तिलक नगर निवासी महेश बैरागी पांच हजार रुपए अपने खाते में जमा करने पलासिया स्थित निजी बैंक पहुंचे। इसमें 50 रुपए के आठ फटे नोट शामिल थे। बैंककर्मी ने 400 रुपए छोड़कर बाकी राशि जमा करने की बात कही। काफी बहस के बाद बैंककर्मी कटे-फटे नोट लेने को राजी हुआ।

केस – 2 : एलआईजी निवासी सॉफ्टवेयर डेवलपर सोमेश सिंह ने बीते दिनों एटीएम से चार हजार रुपए निकाले। इसमें एक 500 के नोट में स्याही लगी थी। दुकानदार ने लेने से माना कर दिया। सोमेश उस नोट को जमा करने बैंक गए तो वहां भी नहीं लिया। इस पर सोमेश ने ब्रांच मैनेजर से शिकायत की।

नहीं कर सकते एक्सचेंज

बैंक भले ही कटे-फटे, टेप लगे, स्याही और रंग वाले नोट से लेने मना नहीं कर सकते। मगर इसके लिए नियम बना रखे हैं। लोगों को एक्सचेंज कर नोट देने का नियम नहीं है। केवल इन नोट को खातों में जमा करवाया जा सकता है। वैसे नोट की स्थिति के आधार पर बैंक मैनेजर निर्णय ले सकता है।

सीधे मना नहीं कर सकते बैंक

कटे-फटे व रंग वाले नोट लेने से कोई भी बैंक सीधे मना नहीं कर सकता। बावजूद इसके वे नोट नहीं लेते हैं तो इस बारे में ब्रांच मैनेजर व मुख्यालय पर शिकायत की जा सकती है। वैसे ऐसे नोटों के लिए आरबीआई ने नियम बना रखे हैं। – मुकेश भट्ट, लीड बैंक मैनेजर

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