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411 करोड़ का स्वास्थ्य घोटाला: ACB का बड़ा एक्शन, सप्लायरों के ठिकानों पर छापा

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रायपुर। 411 करोड़ का स्वास्थ्य घोटाला: ACB का बड़ा एक्शन, सप्लायरों के ठिकानों पर छापा छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) में 411 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। इसको लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार को सरकारी अस्पतालों में रिएजेंट और मशीन सप्लाई करने वालों के 11 ठिकानों में दबिश दी।

411 करोड़ का स्वास्थ्य घोटाला: ACB का बड़ा एक्शन, सप्लायरों के ठिकानों पर छापा

दुर्ग के गंजपारा स्थित मोक्षित कार्पोरेशन के साथ जीई रोड स्थित सीबी कॉर्पोरेशन, रायपुर के धरसींवा, तर्रा स्थित श्री शारदा इंडस्ट्रीज और हरियाणा के पंचकुला में एसीबी की टीम ने छापे की कार्रवाई की। रिएजेंट और मशीन उपलब्ध कराने वाली कंपनी के भ्रष्टाचार को लेकर मीडिया ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।

इसके बाद एसीबी ने 22 जनवरी को मोक्षित कार्पोरेशन के खिलाफ अपराध दर्ज कर छापे की कार्रवाई की। एसीबी ने कंपनी के विरुद्ध अपराध दर्ज किया है। टीम ने मोक्षित कार्पोरेशन से जुड़े लोगों के घर में भी दबिश दी। कार्रवाई के दौरान टीम ने लेन-देन से संबंधित और माल आपूर्ति के लिए पूर्व में लिए टेंडर के दस्तावेज जब्त किए।

कारोबारी ठिकानों से इलेक्ट्रानिक दस्तावेज मिले हैं। दर्ज एफआईआर के अनुसार, मोक्षित कार्पोरेशन ने पहुंच के आधार पर 30 जिलों के साथ 750 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 170 स्वास्थ्य केंद्रों में रिएजेंट आपूर्ति करने का काम किया है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में रिएजेंट संरक्षित कर रखने की जगह नहीं थी, वहां भी सप्लाई कर दी गई।

विधानसभा में उठा था मामला

मोक्षित कार्पोरेशन की रिएजेंट और मशीन आपूर्ति कराने में गड़बड़ी का मामला विधानसभा में भी उठा था। कंपनी के खिलाफ पांच वर्ष में 660 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी करने के आरोप हैं।

अधिकारी मामले की जांच में लगे हैं। शुरुआती जांच में 411 करोड़ का घोटाला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी ने मार्केट दर से सौ गुना ज्यादा में उपलब्ध कराने का काम किया है।

खरीदी में हुआ बड़ा गोलमाल

छत्तीसगढ़ दवा निगम ने 411 करोड़ रुपये के उपकरण और रिएजेंट खरीदने में बड़ा गोलमाल हुआ था। यह खरीदी महज एक माह में की गई। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं (डीएचएस) ने 10 जनवरी, 2022 को खरीदी के लिए इंडेंट भेजा।

इसके बाद भी 15 मई 2023 से 17 जून 2023 के बीच 411 करोड़ के रिऐजेंट की खरीदी की गई। अहम बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्रों में जांच की सुविधा ही नहीं थी, वहां पर रिऐजेंट भेज दिया गया था। छत्तीसगढ़ में 915 से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 186 में लैब तकनीशियन का भी पद स्वीकृत ही नहीं है।

ऐसे हेल्थ सेंटरों में रिऐजेंट और आटो एनालाइजर मशीन भेज दी गई। बता दें कि 2014 के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लैब तकनीशियन का पद सृजित किया गया। मगर, अब तक जहां भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, वहां भर्ती ही नहीं हुई। इन स्वास्थ्य केंद्रों में भी लाखों रिऐजेंट और उपकरण भेज दिए गए।

कार्टेल बनाकर निविदा में लिया भाग

रिऐजेंट की निविदा के लिए मोक्षित कार्पोरेशन, रिकॉर्ड्स एवं मेडिकेयर सिस्टम और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कार्टेल बनाकर निविदा प्रकिया में भाग लिया। निविदा ने तीनों कंपनियों ने मनमानी दर भरी थी।

तीन में से निविदा समिति के द्वारा उपकरणों, रिएजेंट, कंज्यूमेंवल और मशीनो की एल-1 दर को मान्य करते हुए मोक्षित कार्पोरेशन को 25 जनवरी, 2023 को निविदा देने की अनुशंसा की थी। सीजीएमएससी के तत्कालीन प्रबंध संचालक द्वारा निविदा दी गई।

सीजीएमएससी ये अधिकारी हैं जिम्मेदार

जीएम इक्यूमेंट कमलकांत पाटवर द्वारा तत्कालीन संचालक चंद्रकात वर्मा द्वारा तीन बार पत्र लिखकर बताया गया था कि रिऐजेंट की दर अनुबंध वर्तमान समय के हिसाब से ही है। इसके बाद खरीदी की प्रक्रिया शुरू की गई।

नियम तोड़कर, करोड़ की खरीदी

शासन का नियम ही नहीं है कि बिना वजट स्वीकृति के एक रुपए की भी खरीदी की जाए। इस तरह शासन को कर्ज के बोझ से बचाने के लिए 11 सितंबर 2019 को तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक निहारिका बारिक ने सीजीएमएससी को पत्र लिखकर निर्देशित किया था कि बिना स्वास्थ्य संचालनालय बजट मिले किसी भी तरह की खरीदी न की जाए।

इसके बाद भी जरूरत से अधिक रिऐजेंट की खरीदी की मात्रा का निर्धारण किया गया। रिऐजेंट खरीदने के लिए जो इंडेट दिया गया, उसे दिए जाने के पूर्व संचालक स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा न तो बजट उपलब्धता तय की गई, न ही किसी प्रकार का प्रशासनिक अनुमोदन प्राप्त किया गया।

डीएचएस के अधिकारी भी जिम्मेदार

संचालक स्वास्थ्य सेवाएं के अधिकारी चाहते तो पहले दवा खरीद एवं वितरण प्रबंधन सूचना प्रणाली (डीपीडीएमआईएस) माडल को डेवलप करवा सकते थे या गूगल शीट से संस्थावार जरूरी मात्रा की जानकारी ली जा सकती थी। मगर, ऐसा नहीं किया गया। इसलिए एफआईआर में एसीबी ने अधिकारियों को भी आरोपित बनाया है।

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