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वक्फ पर टीडीपी का बड़ा ऐलान: मोदी सरकार के साथ खड़ी टीडीपी, लोकसभा में विधेयक का करेगी समर्थन

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Police ki Hafta Vasooli: ट्रक चालक को डंडे से पीटने वाले ASI पर वसूली का आरोप, SP ने किया सस्पेंड

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Share Bajar Bna Gidad: भारतीय शेयर बाजार में बड़ा क्रैश, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे 3.50 लाख करोड़ रुपये

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Dewas Radhe Krishna Rangoli: भगवान राधा-कृष्ण की रंगोली को पैर से बिगाड़ने वाले प्रोफेसर पर FIR

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कोहली के विराट वचन: 2027 वर्ल्ड कप जीतने का है लक्ष्य, नहीं लेंगे रिटायरमेंट

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अंतरिक्ष से लौटने पर सुनीता विलियम्स को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा? आखिरकार 8 महीनों से अंतरिक्ष में फंसी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स की वापसी का प्लान फाइनल हो गया है. उन्हें 12 मार्च को धरती पर लाया जाएगा. इतने लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने के कारण अब उनकी सेहत पर कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. आइए समझते हैं कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद उन्हें किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. अंतरिक्ष से लौटने पर सुनीता विलियम्स को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा? मार्च में स्पेस से लौटेंगी सुनीता विलियम्स TV9 Bharatvarsh TV9 Bharatvarsh | Updated on: Feb 13, 2025 | 1:25 PM अंतरिक्ष से धरती पर लौटना इतना आसान नहीं. 8 दिनों के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) भेजी गईं भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स आखिरकार 12 मार्च 2025 को धरती पर लौटने वाली हैं. उन्हें और उनके साथी बुच विलमोर को स्पेसक्राफ्ट “स्टारलाइनर” के जरिए वापस आना था, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते यह मिशन अनुमान से अधिक लंबा खिंच गया. नतीजा यह हुआ कि 8 दिनों की यात्रा अब 8 महीनों में बदल गई. इतने लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने के कारण अब उनकी सेहत पर कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. आइए समझते हैं कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद उन्हें किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. इन 7 तरह के मुश्किलों का करना पड़ सकता है सामना 1. चलना-फिरना हो सकता है मुश्किल: अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं. वहां कोई भी काम करने के लिए शरीर को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती क्योंकि हर चीज हवा में तैरती रहती है. लेकिन धरती पर लौटते ही शरीर को गुरुत्वाकर्षण के साथ तालमेल बिठान पड़ता है. यही वजह है कि एस्ट्रोनॉट्स को पहले कुछ दिनों तक चलने फिरने और संतुलन बनाने में मुश्किल होती है. ये भी पढ़ें PM मोदी को ठहराने के लिए वाशिंगटन का ब्लेयर हाउस ही क्यों चुना गया? PM मोदी को ठहराने के लिए वाशिंगटन का ब्लेयर हाउस ही क्यों चुना गया? कैसे भारत को बदनाम करने की किताबी कोशिश सरोजिनी नायडू ने की थी नाकाम? कैसे भारत को बदनाम करने की किताबी कोशिश सरोजिनी नायडू ने की थी नाकाम? धरती पर सूरज... क्या है फ्रांस का ITER प्रोजेक्ट, जिसका भारत हिस्सा? धरती पर सूरज... क्या है फ्रांस का ITER प्रोजेक्ट, जिसका भारत हिस्सा? 2. हड्डियों पर असर: ISS में महीनों तक रहने से हड्डियों का घनत्व हर महीने लगभग 1% तक कम हो जाता है. खासतौर पर पैरों, पीठ और गर्दन की हड्डियां अधिक प्रभावित होती हैं. इससे सुनीता को वापस आने के बाद शारीरिक गतिविधियों में तकलीफ हो सकती है. 3. संतुलन और कोऑर्डिनेशन में दिक्कत: हमारे कानों और मस्तिष्क में एक खास संतुलन प्रणाली जिसे वेस्टिबुलर सिस्टम कहते हैं शरीर को स्थिर रहने में मदद करती है. अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के कारण यह प्रणाली प्रभावित हो सकती है, जिससे संतुलन बनाए रखना कठिन हो सकता है. ऐसे में सुनीता को खड़े होने, चलने और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच तालमेल बनाने में दिक्कत हो सकती है. 4. आंखों पर प्रभाव: स्पेस में जीरो ग्रैविटी के कारण शरीर का तरल पदार्थ सिर की ओर बढ़ जाता है, जिससे आंखों के पीछे की नसों पर दबाव पड़ता है. इसे इसे स्पेसफ्लाइट एसोसिएटेड न्यूरो-ओकुलर सिंड्रोम (SANS) कहा जाता है. इसका असर उनकी दृष्टि पर पड़ सकता है और हो सकता है कि उन्हें चश्मा लगाने की जरूरत पड़े. 5. माइक्रोग्रैविटी की आदत: अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद एस्ट्रोनॉट्स माइक्रोग्रैविटी के आदी हो जाते हैं. वहां किसी भी चीज को छोड़ने पर वह तैरती रहती है, लेकिन धरती पर लौटने के बाद भी उनका मस्तिष्क उसी तरीके से काम करता है. ऐसे में शुरुआत में वे अनजाने चीजों को हवा में छोड़ देते हैं, ये भूलकर कि अब वे गिर जाएंगी. 6. इम्यून सिस्टम और रेडिएशन का प्रभाव: स्पेस में हाई-लेवल रेडिएशन के संपर्क में रहने से एस्ट्रोनॉट्स की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है. इससे उन्हें संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा, लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से डीएनए में बदलाव, हृदय से जुड़ी समस्याएं और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. 7. अंतरिक्ष एनीमिया: एक चौंकाने वाली सच्चाई यह है कि अंतरिक्ष में रहते हुए उनका खून धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. इसे अंतरिक्ष एनीमिया यानी Space Anaemia कहा जाता है. दरअसल, हमारी धरती पर शरीर हर सेकंड 20 लाख रेड ब्लड सेल्स बनाता और नष्ट करता है. लेकिन जब कोई अंतरिक्ष में जाता है, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है. नेचर मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, छह महीने की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एस्ट्रोनॉट्स का शरीर हर सेकंड 30 लाख रेड ब्लड सेल्स नष्ट करने लगता है, यानी सामान्य से 54% ज्यादा. धरती पर लौटने के बाद एस्ट्रोनॉट्स को कमज़ोरी, थकान, सुस्ती महसूस हो सकती है. तो सुनीता विलियम्स कब तक पूरी तरह रिकवर होंगी? धरती पर लौटने के बाद एस्ट्रोनॉट्स को सामान्य जीवन में वापस आने में 45 दिन से लेकर कुछ महीनों या एक साल तक का समय लग सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे कितने समय तक अंतरिक्ष में रहे हैं और उनके शरीर पर इसका कितना असर पड़ा है. सुनीता की सेहत को लेकर डॉक्टर्स भी सतर्क हैं और उनके रिकवरी प्लान को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई है. आने वाले महीनों में मेडिकल सुपरविजन और फिजिकल थेरेपी के जरिए उन्हें सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास किया जाएगा.

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वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर के लिए बड़ी खबर: यमुना एक्सप्रेसवे से वृंदावन तक नया बाईपास बनेगा, शासन से मंजूरी मिली

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DA: मध्य प्रदेश: सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, सातवें वेतन आयोग के हिसाब से मिलेंगे हाउस रेंट और ट्रांसपोर्ट अलाउंससातवें वेतन आयोग के हिसाब से मिलेंगे हाउस रेंट, ट्रांसपोर्ट जैसे अलाउंस

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