12 साल की बहन 7 साल के भाई को बोन मैरो के जरिए देगी जीवनदान
इंदौर। एमवायएच में शनिवार को थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे का बोन मैरो ट्रांसप्लांट होगा। 12 साल की बहन अपने 7 साल के भाई को बोन मैरो देगी। प्रदेश में यह पहला मौका है जब सरकारी अस्पताल में इस तरह का ट्रांसप्लांट हो रहा है। भाई-बहन फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में अस्पताल की बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यूनिट में भर्ती हैं।
एमवायएच की चौथी मंजिल पर बनी बीएमटी यूनिट में मार्च के पहले सप्ताह में दो मरीजों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए गए थे। दोनों ही मरीजों को उन्हीं के स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हुए थे। इन दोनों ट्रांसप्लांट के सफल रहने के बाद अब अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट शुरू हो रहे हैं।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शरद थोरा ने बताया कि जिस बच्चे को उसकी बहन का बोन मैरो ट्रांसप्लांट होना है, वह भोपाल का रहने वाला है। करीब 15 दिन पहले उसे ऑपरेशन के पहले दिया जाने वाला इलाज शुरू किया जा चुका है। फिलहाल बच्चे की स्थिति नियंत्रण में है। अमेरिका से आए विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश सतवानी यह ऑपरेशन करेंगे।
इंदौर का होगा दूसरा मरीज-
करीब तीन महीने पहले एमवायएच में शिविर लगाकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का चयन किया गया था। जिन बच्चों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, उनमें से दो बच्चों को पहले ट्रांसप्लांट के लिए चुना गया। डॉ. थोरा ने बताया भोपाल के बच्चे के बाद इंदौर के बच्चे का ट्रांसप्लांट किया जाएगा।